Saturday, 27 June 2026

यह जीवन -- प्रकाश और अंधकार का खेल है, जिसको हम चाहें या न चाहें, इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते।

 यह जीवन -- प्रकाश और अंधकार का खेल है, जिसको हम चाहें या न चाहें, इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। कई बातें हमें बुरी लगती हैं और कई अच्छी हैं। सृष्टिकर्ता के साथ एक होकर ही हम समझ सकते हैं कि उनके मन में क्या है, और इस खेल के पीछे उनकी क्या मंशा है। सृष्टिकर्ता से प्रार्थना है कि वे हमें अपनी पूर्णता प्रदान करें, और अपने साथ एक करें। ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!

"ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥" (वृहदारण्यकोनिषद व ईशावास्योपनिषद)
मेरी किसी भी तरह की कोई लौकिक अभिलाषा अब नहीं है। एकमात्र अभीप्सा यही है कि जो भी अत्यल्प समय इस जीवन का अवशिष्ट है, वह पूरी सत्यनिष्ठा से परमात्मा के स्मरण, चिंतन, मनन, निदिध्यासन व ध्यान में ही व्यतीत हो। कभी किसी कामना/आकांक्षा का जन्म ही न हो। चारों ओर छाया असत्य का अंधकार दूर हो। धर्म की पुनःस्थापना और वैश्वीकरण हो। अब कहने को और कुछ भी नहीं है। जो भी संवाद हो वह प्रत्यक्ष परमात्मा से ही हो, अन्य किसी से नहीं। ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२४ मई २०२६

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