हमारा सारा कार्य भगवान की चेतना में हो, हम निरंतर उन की चेतना में रहें ---
Monday, 16 February 2026
हमारा सारा कार्य भगवान की चेतना में हो, हम निरंतर उन की चेतना में रहें ---
महिषासुर और नरकासुर अपनी मौत खुद मरेंगे .......
१६ फरवरी २०१४ को हमारे शूरवीरों, भक्तों, दानियों, और परिश्रमी उद्योगपतियों की वीर भूमि के नगर झुंझुनू (राजस्थान) में संघ का बहुत ही भव्य पथ संचलन हुआ|
१६ फरवरी २०१४ को हमारे शूरवीरों, भक्तों, दानियों, और परिश्रमी उद्योगपतियों की वीर भूमि के नगर झुंझुनू (राजस्थान) में संघ का बहुत ही भव्य पथ संचलन हुआ|
परमात्मा के ध्यान में समर्पित होकर, मैं अनंत और उस से भी परे हूँ ---
विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी कि अधिष्ठात्री माता सरस्वती को 'बसंत पंचमी' के शुभ अवसर पर नमन ---
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः !! विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी कि अधिष्ठात्री माता सरस्वती को 'बसंत पंचमी' के शुभ अवसर पर नमन, और सभी का अभिनंदन !!
सुषुम्ना नाड़ी में क्रियायोग -- सरस्वती पूजन है ---
हमारी सूक्ष्म देह में सुषुम्ना नाड़ी प्रत्यक्ष सरस्वती है| सुषुम्ना चैतन्य होती है तब कुंडलिनी महाशक्ति जागृत होती है| मेरुदंड के सभी चक्रों को जागृत करती हुई जब कुंडलिनी सहस्त्रार में प्रवेश करती है, तब वहाँ इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना -- इन तीनों प्राण-प्रवाहों का संगम होता है| वही ज्ञान-क्षेत्र है, जहाँ से परमात्मा का ज्ञान होना आरंभ होता है| सहस्त्रार में स्थितप्रज्ञ होकर पारब्रह्म परमशिव की उपासना करें| बाकी चिंताओं को छोड़ दें| जो चिंता करनी है वह स्वयं भगवती करेंगी| चिंता करना भगवती का काम है, हमारा नहीं| चेतना को निरंतर आज्ञाचक्र से ऊपर रखें, और सहस्त्रार में तेलधारा की तरह जो मंत्र गूंज रहा है, उसे ही सुनते रहें| सुषुम्ना नाड़ी में क्रियायोग -- सरस्वती पूजन है| आज वसंत पंचमी है और आज सरस्वती माता की पूजाका खास महत्व है|
मेरी ओर से सब निश्चिंत रहें, मेरी किसी से कोई अपेक्षा नहीं है ---
मेरी ओर से सब निश्चिंत रहें। मेरी किसी से कोई अपेक्षा नहीं है। मैं न तो कभी आपसे कोई धन मांगूंगा, न ही अन्य कोई चीज। अतः शंका न करें। मेरी सिर्फ एक ही प्रार्थना है, कि सत्य-सनातन-धर्म और भारत के प्रति आपके हृदय में प्रेम और स्वाभिमान जागृत हो। और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। इतने लेख मेरे माध्यम से इसलिए लिखे जाते हैं, क्योंकि भगवान लिखवाते हैं। मैं अपनी मर्जी से कुछ नहीं लिखता। .
सूक्ष्म जगत ---
सूक्ष्म जगत इस भौतिक जगत से बहुत अधिक विशाल है। जैसे इस अथाह भौतिक जगत की कोई थाह नहीं है, वैसे ही अति-अथाह सूक्ष्म जगत की भी कोई थाह नहीं है। कोई सिद्ध महात्मा ही उसे जान सकता है। सूक्ष्म जगत से आगे के भी कई लोक हैं जिनके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। हरेक निष्ठावान भक्त साधक को सूक्ष्म जगत की अनुभूतियाँ अवश्य होती हैं, लेकिन इसकी चर्चा का निषेध है इसलिए वे इस विषय पर कुछ नहीं बोलते।
"आनंद" की अनुभूति का एकमात्र स्त्रोत "परमप्रेम" (भक्ति) है ---
"आनंद" की अनुभूति का एकमात्र स्त्रोत "परमप्रेम" (भक्ति) है ---