१६ फरवरी २०१४ को हमारे शूरवीरों, भक्तों, दानियों, और परिश्रमी उद्योगपतियों की वीर भूमि के नगर झुंझुनू (राजस्थान) में संघ का बहुत ही भव्य पथ संचलन हुआ|
पूरे झुंझुनू जिले से हज़ारों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में दंड सहित आए| तीन घोष वाद्य साथ में थे| लगभग तीन किलोमीटर लम्बे मार्ग पर पथ संचलन हुआ| आधा किलोमीटर से अधिक लम्बी तो स्वयंसेवकों की पंक्तियाँ ही थीं| पूरे मार्ग पर अति भव्य पुष्प वर्षा हुई| हजारों माताओं ने भोजन के पैकेट बनाकर बाहर से आये स्वयंसेवकों के लिए भिजवाये|
पूरा नगर भगवा हो गया| क्षेत्र की सुप्त हिन्दू चेतना पुनश्चः जागृत हुई|
सभी नागरिकों को अपने हिन्दू होने पर गर्व हुआ|
इस जिले झुंझुनूं ने भारतीय सेना को सर्वाधिक सैनिक दिए हैं| सभी युद्धों में सबसे अधिक सैनिक भी इसी जिले के ही वीर गति को प्राप्त हुए हैं|
भारत के दो तिहाई उद्योगपति भी इसी क्षेत्र के हैं| यहाँ की भूमि ने बहुत बड़ी संख्या में वीरों दानियों और भक्तों को जन्म दिया है|
जय सनातन संस्कृति ! जय भारत ! जय श्री राम !
१६ फरवरी २०१४
.
संशोधन :----- कल 16 फरवरी को हमारे नगर का संघ संचलन पूरे पाँच किलोमीटर से भी अधिक लम्बे मार्ग पर चला और संचलन की लम्बाई एक किलोमीटर से भी अधिक थी, यानि सबसे आगे की पंक्ति से सबसे पीछे की पंक्ति के बीच एक किलोमीटर तक स्वयंसेवक ही स्वयंसेवकों की वाहिनियाँ घोष के साथ पूर्ण गणवेश में कदम से कदम मिलाकर चल रही थीं| प्रचल: से पूर्व अनेक वाहिनियाँ पूर्ण गणवेश में और आकर जुड़ गयी थीं|
पूरा नगर उमड़ पड़ा था और हजारों माताओं बहिनों ने पाँच किलोमीटर लम्बे मार्ग पर अपने लाडलों का स्वागत पुष्पवर्षा से किया| तीन हज़ार माताओं ने अपने घरों से लाकर बाहर से आने वालों के लिए भोजन की व्यवस्था की|
मैं प्रथम वाहिनी में आगे था अतः पीछे की ओर मुड़ कर देखने का अवसर ही नहीं मिला| जिस संचलन को को आधा किलोमीटर लम्बा समझ रहा था व एक किलोमीटर लम्बा था|
दस वर्ष के बच्चों से लेकर 70 वर्ष तक के प्रोढ़ इस सञ्चलन में थे| मेरी स्वयं की आयु
66 वर्ष है पर इस संचलन में युवाओं सा उत्साह था| पूरे पाँच किलोमीटर तक कदम से कदम मिलाकर चलने में कोई जोर नहीं आया|
क्षेत्र के सभी साधू संत भी आशीर्वाद देने आये| इन तपस्वी संतों की उपस्थिति और आशीर्वाद से हमारे संकल्प को और भी बल मिला कि हम निश्चित रूप से विजयी होंगे और भारत माँ को अपने द्वीगुणित परम वैभव के साथ अखंडता के सिंहासन पर बैठायेंगे और सनातन धर्म की पूरे विश्व में पुनर्स्थापना करेंगे|
(१७ फरवरी २०१४)
No comments:
Post a Comment