"परम प्रेम" और "समर्पण" का स्वभाव हमें अपने "शिवत्व" का बोध कराता है .....
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Thursday, 4 June 2026
"परम प्रेम" और "समर्पण" का स्वभाव हमें अपने "शिवत्व" का बोध कराता है .....
सेक्युलरिज्म (धर्म निरपेक्षता) का जन्म कैसे हुआ ? .....
सन १८५१ ई.में इंग्लैंड के राजा हेनरी आठवें को अपनी पत्नी को तलाक देना था जिसके लिए पॉप की अनुमति आवश्यक थी| पॉप ने वह अनुमति नहीं दी| इसलिए पॉप के आदेश को ठुकराने के लिए इंग्लेंड में धर्मनिरपेक्षता यानि सेकुलरिज्म का सिद्धांत बनाया गया जिसके अंतर्गत इंग्लैंड का राजा पॉप के आदेश को मानने केलिए बाध्य नहीं था| सेकुलर का मतलब है चर्च के आदेश को नहीं मानने वाला| हम आज उन्हीं अंग्रेजों की नक़ल कर के सेकुलर बन रहे हैं|
"यथा ब्रज गोपिकानाम्" ----
"यथा ब्रज गोपिकानाम्" ----
Wednesday, 3 June 2026
मैं जड़-चेतन और यह सारी सृष्टि हूँ। केवल मैं हूँ। ---
मैं जड़-चेतन और यह सारी सृष्टि हूँ। केवल मैं हूँ। मैं ही परमब्रह्म परमशिव और विष्णु हूँ। मुझसे अन्य कोई या कुछ भी नहीं है।
"आनन्द सिन्धु मध्य तव वासा, बिनु जाने तू मरत पियासा" ---
"आनन्द सिन्धु मध्य तव वासा, बिनु जाने तू मरत पियासा" ---
Tuesday, 2 June 2026
भगवान की भक्ति से क्या मिलेगा? --- -- (संशोधित व पुनःप्रेषित लेख) .
भगवान की भक्ति से क्या मिलेगा? --- -- (संशोधित व पुनःप्रेषित लेख)
कोई भी आध्यात्मिक साधना हो या कोई भी आस्था --- उसके औचित्य का एक ही मापदंड है -- "परमात्मा की अनुभूति" ---
कोई भी आध्यात्मिक साधना हो या कोई भी आस्था --- उसके औचित्य का एक ही मापदंड है -- "परमात्मा की अनुभूति"। आप किसी भी मार्ग पर चल रहे हों, यदि आपको दिव्य प्रेम, आनंद, और परमात्मा की निरंतर अनुभूति होती है तो वह मार्ग सही है; अन्यथा गलत। हमारा लक्ष्य केवल परमात्मा है।