श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है| भारत की वर्तमान समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए अरविन्द के इन शब्दों को समझना आवश्यक है|
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Sunday, 23 August 2026
श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है|
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें।
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें। वे ही नारायण हैं, वे ही पुरुषोत्तम हैं, और वे ही परमशिव हैं। इसके लिए हमें वीतराग यानि राग-द्वेष और अहंकार से तो मुक्त तो होना ही होगा। यह आरंभिक लक्ष्य है।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है - --
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है। मुझे मेरी सब कमियों का पता है, लेकिन उनके समक्ष मैं असहाय हूँ। भगवान से मैंने प्रार्थना की तो भगवान ने कहा कि अपने सब शत्रु मुझे सौंप दो, लेकिन उनसे पहले स्वयं को (यानि अपने को) मुझे (यानि भगवान को) अर्पित करना होगा। स्वयं को अर्पित करने में बाधक है मेरा लोभ और अहंकार, यानि कुछ होने का और खोने का भाव।
Saturday, 22 August 2026
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है ---
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है। राजस्थान की भूमि तो भक्ति और आस्था का संगम है। यहाँ के लोगों के स्वभाव में भगवान की बहुत गहरी भक्ति है, बस कोई जगाने वाला चाहिये।
Tuesday, 18 August 2026
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता" ---
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता"| इस स्वधर्म की रक्षा का अनवरत प्रयास ही मेरी दृष्टि में आध्यात्म है, अन्य कुछ भी नहीं| आध्यात्म कोई व्यक्तिगत मोक्ष, सांसारिक वैभव, इन्द्रीय सुख या अपने अहंकार की तृप्ति की कामना का प्रयास नहीं है| यह कोई दार्शनिक वाद विवाद या बौद्धिक उपलब्धी भी नहीं है| साथ साथ सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों का विनाश भी हमारा लौकिक धर्म है|