गुरु-पूर्णिमा पर गुरु रूप में "कूटस्थ-ब्रहम" परमात्मा को नमन !! वे ही गुरु-रूप में हमारे समक्ष आते हैं। ध्यान साधना में भगवान स्वयं को "ज्योतिषांज्योति कूटस्थ अक्षर ब्रह्म" के रूप में प्रकट करते हैं। वे ही गुरु रूप में मेरे समक्ष आए। वे ही गुरु हैं, और वे ही शिष्य हैं। स्वयं उन्हीं की उपासना, उन्हीं के द्वारा, मुझे निमित्त बनाकर होती है।
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Sunday, 12 July 2026
गुरु-पूर्णिमा पर गुरु रूप में "कूटस्थ-ब्रहम" परमात्मा को नमन !!
आध्यात्मिक दृष्टि से मैं सभी के साथ एक हूँ| सारी सृष्टि मेरा हृदय है जिसका केंद्र सर्वत्र है और परिधि कहीं भी नहीं|
आध्यात्मिक दृष्टि से मैं सभी के साथ एक हूँ| सारी सृष्टि मेरा हृदय है जिसका केंद्र सर्वत्र है और परिधि कहीं भी नहीं|
Saturday, 11 July 2026
जब भी समय मिले अपनी साँसों पर ध्यान दो ---
जब भी समय मिले अपनी साँसों पर ध्यान दो ---
"यदि आप "लोभ और अहंकार" से स्वयं को मुक्त कर सकते हो, और "ब्रह्मचर्य" का पालन कर सकते हो तो आध्यात्मिक साधना आपके लिए है, अन्यथा भूल जाइये॥"
"यदि आप "लोभ और अहंकार" से स्वयं को मुक्त कर सकते हो, और "ब्रह्मचर्य" का पालन कर सकते हो तो आध्यात्मिक साधना आपके लिए है, अन्यथा भूल जाइये॥"
तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे काँटों से भी प्यार
भगवान से उनके प्रेम से अतिरिक्त अन्य कुछ भी मांगना भगवान का अपमान है। यह नकारात्मक बात दिमाग से निकाल दीजिये कि कोई मुझे आशीर्वाद दे और परिस्थितियाँ मेरे अनुकूल रहें। यह एक सूक्ष्म लोभ और अहंकार मात्र है, जिनसे मुक्त हुए बिना कोई भी आध्यात्मिक सफलता नहीं मिलती। आध्यात्मिक सफलता मिलती है सिर्फ समर्पण से।
Thursday, 9 July 2026
विषय-वासना समाप्त हो, और वेदान्त-वासना दृढ़ हो ---
विषय-वासना समाप्त हो, और वेदान्त-वासना दृढ़ हो ---
सभी मनुष्यों का स्वधर्म एक ही है।
इस पृथ्वी पर सभी मनुष्यों का स्वधर्म एक ही है ---