"सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः"
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Friday, 26 June 2026
सत्य की विजय होती है, असत्य की नहीं। सत्य के द्वारा ही देवयान मार्ग (मोक्ष का मार्ग) प्रशस्त होता है ---
निज चेतना में यदि कुछ उपलब्ध होने को है तो वह "तुरीयातीत अवस्था" है ---
निज चेतना में यदि कुछ उपलब्ध होने को है तो वह "तुरीयातीत अवस्था" है, जिसमें साधक का पृथक अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाता है, और वह ईश्वर के साथ एक होता है। जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति, के पश्चात तुरीय अवस्था आती है, जिसमें साधक एक साक्षीमात्र हो जाता है, और उसका मन पूर्णतः शांत हो जाता है।
परमात्मा से हमारा क्या संबंध है?
यह प्रश्न ही असंगत यानी गलत है। संबंध वहीं होता है जहां कोई भेद होता है। यहाँ तो कोई भेद ही नहीं है, अतः संबंध होने या न होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। परमात्मा ही हमारा एकमात्र अस्तित्व है। यह बात मैं नहीं कह रहा, बल्कि श्रुति भगवती स्वयं सामवेद के छान्दोग्य उपनिषद (६.२.३) में कह रही है --
प्रश्नोपनिषद के ऊपर एक लघु चर्चा ---
प्रश्नोपनिषद के ऊपर एक लघु चर्चा ---
जो सर्वात्म-भाव में हैं, वे ईश्वर के साथ एक हैं ---
अब तक आप के हृदय में ईश्वर के प्रति एक परमप्रेम जागृत हो गया होगा, जिसमें आप उनके सौन्दर्य, माधुर्य और परमप्रेम में डूब गये होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो यह एक अति गंभीर चिंता का विषय है। आप प्रयासपूर्वक निरंतर उनके प्रेमसिंधु में डूबे रहें, यही उनकी बड़ी से बड़ी उपासना है। आपके और उनके बीच में केवल प्रेम का रस रहना चाहिए, अन्य कुछ भी नहीं। उस प्रेमरस में पूरी तरह डूब जाएँ, कहीं कोई भेद न रहे। गीता में भगवान कहते हैं --
आजकल ब्राह्मणों के विरुद्ध बहुत अधिक भेदभाव, अन्याय और दुष्प्रचार हो रहा है।
आजकल ब्राह्मणों के विरुद्ध बहुत अधिक भेदभाव, अन्याय और दुष्प्रचार हो रहा है। दुर्भाग्य से यह सत्य है। ईसाई मज़हब के प्रचारकों ने सनातन हिन्दू धर्म को नष्ट करने के लिए सर्वप्रथम ब्राह्मणों की संस्था को समाप्त करने की पूरी चेष्टा की, और अभी भी कर रहे हैं। उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थों को प्रक्षिप्त किया, ब्राह्मणों के विरुद्ध बहुत अधिक दुष्प्रचार किया, और बहुत बड़ी संख्या में ब्राह्मणों की हत्याएँ की। उनके द्वारा लिखे गए झूठे इतिहास को अब भी पढ़ाया जाता है। इतना अधिक असत्य फैलाया गया है, और अभी भी फैलाया जा रहा है, जिसका दुष्परिणाम ब्राह्मणों के विरुद्ध हो रहा अत्याचार है।
ब्राह्मण एक विशेष रचना है भगवान की ---
ब्राह्मण एक विशेष रचना है भगवान की ---