परमात्मा की चेतना में दिन-रात निरंतर बने रहना ही उच्चतम स्थिति है ---
योगोदय (Yogodaya)
स्वयं के आध्यात्मिक विचारों की अभिव्यक्ति ही इस ब्लॉग का एकमात्र उद्देश्य है |
Sunday, 8 February 2026
परमात्मा की चेतना में दिन-रात निरंतर बने रहना ही उच्चतम स्थिति है ---
Wednesday, 4 February 2026
भगवान वासुदेव स्वयं शांभवी मुद्रा में बैठे हैं, और अपने परमशिव (परम कल्याणकारक) रूप का ध्यान स्वयं कर रहे हैं ---
मेरा कुछ साधना/उपासना करने का भाव मिथ्या है। मैं न तो किसी तरह की कोई साधना, उपासना या भक्ति करता हूँ, और न कुछ अन्य भला कार्य। मैंने यदि कभी इस तरह का कोई दावा भी किया है तो वह असत्य था। असत्य वचन के लिए मैं क्षमायाचना करता हूँ।
Tuesday, 3 February 2026
आज बसंतपंचमी और सरस्वती-पूजा है। मंगलमय शुभ कामनाएँ ..... .
आज बसंतपंचमी और सरस्वती-पूजा है। मंगलमय शुभ कामनाएँ .....
अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही परमात्मा की प्राप्ति (भगवत्-प्राप्ति) हो सकती है ---
"अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही परमात्मा की प्राप्ति (भगवत्-प्राप्ति) हो सकती है। अन्य कोई मार्ग नहीं है। हम कोई भी साधना करें, ईश्वर-लाभ केवल "अनन्य-योग" और "अव्यभिचारिणी-भक्ति" से ही होगा ---
श्रीमद्भगवद्गीता का सार जो मुझे अपनी अति अल्प और सीमित बुद्धि से समझ में आया है -- .
श्रीमद्भगवद्गीता का सार जो मुझे अपनी अति अल्प और सीमित बुद्धि से समझ में आया है --
समर्पण ---
किसी भी तरह का वर्ग-संघर्ष, विशेषकर जातिगत वर्ग-संघर्ष, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत अधिक घातक है ---
किसी भी तरह का वर्ग-संघर्ष, विशेषकर जातिगत वर्ग-संघर्ष, समाज और राष्ट्र के लिए बहुत अधिक घातक है। यह हमारा दुर्भाग्य है कि जो लोग "सामाजिक समरसता" की बातें करते थे, वे ही अब "सामाजिक विषमता" उत्पन्न कर रहे हैं। दूसरों का सिर काट कर कोई बड़ा नहीं बन सकता। आरक्षण के नाम पर दूसरों (अनारक्षित वर्ग) का सिर काटा जा रहा है।