राम जन्मभूमि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव -- (२२ जनवरी २०२४)
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धर्म/अधर्म के नाम पर विवाद करने वाले कुछ भी कहें, हम तो पौष शुक्ल द्वादशी विक्रम संवत २०८० (२२ जनवरी २०२४) को पूर्वाह्न ११ बजे से अपराह्न १ बजे तक अनेक संत-महात्माओं व भक्तों के साथ भजन-कीर्तन करेंगे, बड़ी LED स्क्रीन लगाकर अयोध्या के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को देखेंगे, शंख-ध्वनि , घंटानाद , आरती और पौष-बड़ों का प्रसाद वितरित करेंगे। दो अलग अलग स्थानों से निमंत्रण आ चुके हैं, लेकिन हम वहीं जाएँगे जहाँ संत-महात्मा होंगे। सायंकाल दीपोत्सव भी मनाएंगे। रात्रि को भगवान श्रीराम का ध्यान भी करेंगे। पाँच-सौ वर्षों का कलंक दूर हो रहा है। पता नहीं हमारे पूर्वजों की कितनी पीढ़ियाँ इस दिन की प्रतीक्षा में गुजर गईं। वे जहाँ भी हैं, उन्हें आनंद होगा।
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सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति व सभ्यता का केंद्र अब अयोध्या होगी। अयोध्या की प्रतिष्ठा अब वही होगी जो वेटिकन और मक्का की है। पूरा विश्व "सनातन हिन्दू भारत" की प्रतीक्षा कर रहा है। भगवत्-प्राप्ति और निरंतर भगवत्-चेतना में स्थिति -- हमारा धर्म है। यह उत्सव हमारे धर्म का पुनरोत्थान करेगा।
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आज का दिन बहुत अधिक शुभ था। कई दिनों के पश्चात आज का मौसम बहुत अच्छा था। खूब धूप निकली, और सर्दी भी कम थी। आध्यात्मिक रूप से भी बहुत शुभ दिन था। जिस भी दिन भगवान की स्मृति बनी रहे वह दिन बहुत अधिक शुभ होता है।
"सीताराम चरण रति मोरे। अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे॥
जेहीं बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहू सो बेगि दास मैं तोरा॥"
ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
११ जनवरी २०२४