Thursday, 27 November 2025

शिव के नाम पर पाखंड करने की चाल इंदिरा की थी, बाला तो मुखोटे थे ---

 (Acharya Chandrashekhar Shaastri की वाल से साभार copy/pasted लेख)

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शिव के नाम पर पाखंड करने की चाल इंदिरा की थी, बाला तो मुखोटे थे, जो अब उतर गया है शवसेना
नवाब मलिक ने बिल्कुल सच बोला कि शिवसेना का जन्म हिंदुत्व के लिए नहीं हुआ था और ना ही शिवसेना कभी हिंदुत्ववादी रही ।
दरअसल शिवसेना को इंदिरा गांधी ने बनाया था। इंदिरा गांधी के समय में मुंबई ट्रेड यूनियन, मजदूर नेताओं और हड़ताल कराने वालों का गढ़ बन गया था। शंकर गुहा नियोगी से लेकर जॉर्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में बहुत लंबी लंबी हड़ताल चली जिसमें रेलवे से लेकर महाराष्ट्र सरकार के तमाम विभाग जैसे परिवहन से लेकर बिजली विभाग शामिल थे सब के सब हड़ताल के चपेट में थे ।
उसी जमाने में पानी वाली बाई के नाम से मशहूर मृणाल गोरे ने जो पानी को लेकर आंदोलन किया था उसे आजाद भारत का महिलाओं द्वारा किया गया सबसे बड़ा आंदोलन कहते हैं । लाखों की संख्या में महिलाएं घरों से निकलकर सड़क पर प्रदर्शन की थी
तब इंदिरा गांधी को लगा कि हड़ताल से निपटने का सबसे अच्छा उपाय यही है इनके सामने भी एक गुंडागर्दी खड़ी कर दी जाए। इंदिरा गांधी ने यह नोटिस किया कि इस हड़ताल में सब लोग एक भारतीय की हैसियत से शामिल होते हैं यानी कहीं कोई क्षेत्रवाद नहीं होता था उसके बाद इंदिरा गांधी ने यह सोचा क्यों ना महाराष्ट्र में क्षेत्रवाद का बीज बो दिया जाए जिससे कोई ईसाई जॉर्ज फर्नांडिस या फिर कोई छत्तीसगढ़ का शंकर गुहा नियोगी आकर महाराष्ट्र में अपनी पैठ बनाकर हड़ताल ना कर सके और यूनियन बाजी बंद हो जाए
इंदिरा गांधी ने बाल ठाकरे को बढ़ावा दिया और बाल ठाकरे ने इंदिरा गांधी के साथ मिलकर बड़ी चालाकी से मुंबई की एकता को तोड़ने का काम किया बाल ठाकरे ने सबसे पहला आंदोलन दक्षिण भारतीयों खासकर शेट्टी लोगों के खिलाफ किया उन्होंने नारा दिया बजाओ पुंगी भगाओ लूंगी यानी मुंबई में जितने भी दक्षिण भारतीय थे उनको शिवसेना के गुंडे लाठी लेकर मार मार कर भगाते थे फिर उसके बाद बाल ठाकरे ने अपना आंदोलन उत्तर भारतीयों के खिलाफ किया फिर उसके बाद बाल ठाकरे ने अपना आंदोलन गुजरातियों के खिलाफ किया ।
बाल ठाकरे ने एक साथ सभी बाहरी लोगों पर हमला नहीं बोला क्योंकि उन्हें पता था यदि वह एक साथ सब पर हमला बोलेंगे इकट्ठे होकर जवाब देंगे इसीलिए इंदिरा गांधी की सलाह पर बारी-बारी से एक-एक के खिलाफ हमला किया गया यहां तक कि जब इंदिरा गांधी ने भारत में इमरजेंसी लगाई थी उस वक्त बाल ठाकरे और शिवसेना के साथ खड़ी थी और बाल ठाकरे का समर्थन किया
और जैसा हर एक आंदोलन में हुआ है इंदिरा गांधी ने पहले किसी को आगे करके अपना काम निकाला बाद में उसे खत्म कर दिया चाहे वह पंजाब का भिंडरावाले हो या फिर नागालैंड का मूवीवा हो
इंदिरा गांधी के शह पर शिवसैनिकों को तहबाजारी वसूली, ठेले वालों से वसूली, टेंपो वालों से वसूली और अपना यूनियन बनाकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों से वसूली का चस्का लग गया था इसलिए उन्होंने अपना काम चालू रखा और बाद में थोड़े समय के लिए इन्होंने हिंदूवादी का चोला जरूर ओढ़ा था।
और पैसे बनाने के लिए शिवसेना ने ही माइकल जैक्सन का कंफर्ट मुंबई में आयोजित करवाया था और उस कंफर्ट का पूरा टिकट शिवसेना ने बेचा था

विश्व के तीन स्थानों पर इस समय युद्ध की पूरी संभावनायें हैं। यह कोई ज्योतिषीय भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि वर्तमान घटनाक्रम के गहन विश्लेषण का सार है ---

 विश्व के तीन स्थानों पर इस समय युद्ध की पूरी संभावनायें हैं। यह कोई ज्योतिषीय भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि वर्तमान घटनाक्रम के गहन विश्लेषण का सार है ---

(१) भारत का -- चीन और पाकिस्तान से युद्ध।
(२) रूस व बेलारूस का -- यूक्रेन व उसके समर्थकों से युद्ध।
(३) ताइवान व उसके समर्थकों का -- चीन से युद्ध।
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भारत बिलकुल मध्य में पड़ता है। भगवान भारत की निश्चित रूप से रक्षा करेंगे। भारत का दुर्भाग्य था कि तत्कालीन भारत सरकार ने भारत की रक्षा नहीं की और तिब्बत का पूरा भाग चीन को सौंप दिया। यही नहीं, पाकिस्तान का निर्माण भी भारत का दुर्भाग्य था। जिस भूमि पर पाकिस्तान बना वहाँ हम अपनी अस्मिता की रक्षा नहीं कर पाये। भारत के लद्दाख और कश्मीर का बहुत बड़ा भूभाग पाकिस्तान और चीन ने हमसे छीन रखा है।
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यूक्रेन व जार्जिया के साथ भी अन्याय हुआ है। ये देश अपनी स्वयं की रक्षा करने में असमर्थ हैं। यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। रूस ने यूक्रेन से पूरा क्रीमिया प्रायदीप छीन लिया, अजोव सागर पर भी अधिकार कर रखा है, और यूक्रेन के दोनेत्स्क क्षेत्र पर अपने समर्थकों से अधिकार करवा रखा है। यूक्रेन में बहुत अधिक तनाव है। यदि अमेरिका के बीच में कूद पड़ने का भय नहीं होता तो अब तक रूसी सेना पूरे यूक्रेन पर अधिकार कर चुकी होती।
ऐसे ही जार्जिया की स्थिति है। इस देश के उत्तर में रूस है, व दक्षिण में तुर्की, अज़र्बेजान और आर्मेनिया। जार्जिया के अब्खाजिया और दक्षिण ओशेतिया प्रान्तों पर रूसी सेना ने अधिकार कर रखा है। पूर्व रूसी तानाशाह स्टालिन मूल रूप से जार्जिया का ही था।
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दक्षिण चीन सागर के ताइवान द्वीप की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में भारत के लोगों को अच्छी तरह पता है। विश्व में सबसे अधिक तनाव वहीं है। कभी भी वहाँ युद्ध छिड़ सकता है। वहाँ युद्ध छिड़ गया तो भारत भी अछूता नहीं रहेगा।
कुछ दिनों में रूसी राष्ट्रपति की होने वाली भारत की यात्रा, रूस का एक बहुत बड़ा कूटनीतिक अभियान है, जिसमें भारत को भी अपनी सर्वश्रेष्ठ कूटनीतिक प्रतिभा दिखानी होगी।
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कृपा शंकर
२७ नवंबर २०२१