Saturday, 21 February 2026

तृतीय विश्व युद्ध की आहट हो रही है। चाहे सारा ब्रह्मांड टूटकर बिखर जाए, भय की कोई बात नहीं है ---

 तृतीय विश्व युद्ध की आहट हो रही है। चाहे सारा ब्रह्मांड टूटकर बिखर जाए, भय की कोई बात नहीं है। कुछ भी हो सकता है, घबराएँ नहीं। भगवान सदा हमारे साथ हैं। हम अपने धर्म पर अडिग रहें। थोड़े-बहुत धर्म का पालन भी हमारी रक्षा करेगा। भगवान कहते हैं --

"नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्॥२:४०॥"
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अति भयावह वन की घोर अंधकारमय निशा में जब सिंहनी भयानक गर्जना करती है तब सारा वन कांप उठता है। उस डरावने वातावरण में विकराल सिंहनी के समीप खड़ा सिंह-शावक क्या भयभीत होता है? यहाँ जगन्माता स्वयं प्रत्यक्ष हमारे समक्ष खड़ी हैं। उनको अपने हृदय का सर्वश्रेष्ठ प्रेम दें। हमारी रक्षा होगी।
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"क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं
चाहे हृदय को ताप दो चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्य पथ से किंतु भागूँगा नहीं
वरदान माँगूँगा नहीं"
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ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२१ फरवरी २०२२

संसार में बुराई की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भलाई की ---

 संसार में बुराई की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भलाई की --

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यदि संसार में सारे प्राणी सज्जन हो जाएँ, या सभी दुर्जन हो जाएँ, तो यह सृष्टि तत्क्षण नष्ट हो जायेगी| संसार में बुराई है इसीलिए अच्छाई भी है| संसार में दुर्जन हैं इसीलिए सज्जन भी हैं जो अच्छे कार्य करते हैं, अन्यथा कोई भी नहीं करेगा|
जो विवेकी हैं वे स्थिर बुद्धि के होते हैं, एक बार जो कार्य आरम्भ करते हैं उसे पूरा कर के ही छोड़ते हैं| जो हमारा उपकार करते हैं, उनके प्रति हमें कृतज्ञ रहना चाहिए| कृतघ्नता बहुत बड़ा पाप है| हमारा व्यवहार सदा मधुर हो यह हमारे चरित्र की शोभा है| सत्य भी कहें तो ऐसे कहें जो दूसरों को प्रिय लगे| किसी के पीछे से उसके बारे में कोई बात नहीं करनी चाहिए| इससे दुर्भावना और शत्रुता फैलती है|
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सबसे बड़ा गुण है ... हमारे हृदय में परमात्मा की चेतना निरंतर बनी रहे| हृदय में परमात्मा होंगे तो सभी कार्य अच्छे ही होंगे|
हरिः ॐ तत् ॐ सत्॥ ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर
२१ फरवरी २०१७