Wednesday, 11 March 2026

आप सब जीव से शिव बनें और परमात्मा में आपकी जागृति हो ---

 "नास्ति नादात परो मन्त्रो न देव: स्वात्मन: पर:

नानु सन्धात परा पूजा नहि तृप्ते: परम सुखं"
There is no mantra superior to Nada and there is no other deity superior to Atma. No worship is superior to the worship of soul.
किसी भी साधना से लाभ उसका अभ्यास करने से है, उसके बारे में जानने मात्र से या उसकी विवेचना से नहीं है| आपके सामने मिठाई पडी है तो उसका आनंद उस को चखने और खाने में है, न कि उसकी विवेचना में| भगवान का लाभ उसकी भक्ति यानि उससे प्रेम करने में है न कि उसके बारे में की गयी बौद्धिक चर्चा में|
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प्रभु के प्रति प्रेम हो, समर्पण का भाव हो और आपके भावों में शुद्धता हो तो कोई हानि होने कि सम्भावना नहीं है|
जब पात्रता हो जाती है तब गुरु का पदार्पण भी जीवन में हो जाता है|
जो भी बात बताने की मुझे प्रेरणा हुई वह मेरे द्वारा लिखी गयी है|
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मन्त्रयोग संहिता में आठ प्रमुख बीज मन्त्रों का उल्लेख है जो शब्दब्रह्म ओंकार की ही अभिव्यक्तियाँ हैं| लिंग पुराण के अनुसार ओंकार का प्लुत रूप नाद है| मन्त्र में पूर्णता "ह्रस्व", "दीर्घ" और "प्लुत" स्वरों के ज्ञान से ही आती है जिसके साथ पूरक मन्त्र की सहायता से विभिन्न सुप्त शक्तियों का जागरण होता है| वर्णात्मक और ध्वन्यात्मक नाद, बिंदु और मुद्राओं व साधन क्रम का ज्ञान सद्गुरु ही करा सकता है|
स्थिर तन्मयता (Stable total identification) ही नादानुसंधान है|
बीजमंत्रों, अजपा-जप, षटचक्र साधना, योनी मुद्रा में ज्योति दर्शन, और नाद व ज्योति तन्मयता, खेचरी मुद्रा, साधन क्रम आदि का ज्ञान गुरु की कृपा से ही हो सकता है| साधना में सफलता भी गुरु कृपा से ही होती है और ईश्वर लाभ भी गुरु कृपा से होता है|
आप सब जीव से शिव बनें और परमात्मा में आपकी जागृति हो|
ॐ नमः शिवाय| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय| ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ||
कृपाशंकर
फाल्गुन शु.३, वि..स.२०७२, 11March2016