Monday, 27 April 2026

इधर-उधर की मन बहलाने वाली मीठी मीठी बातों से काम नहीं चलेगा ---

 इधर-उधर की मन बहलाने वाली मीठी मीठी बातों से काम नहीं चलेगा। उन में भटकाव ही भटकाव है। सीधी सी बात है ---

(१) जब तक हम अपने अन्तःकरण (मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) पर विजय नहीं पाते, तब तक कोई आध्यात्मिक प्रगति नहीं हो सकती।
(२) इन पर विजय के पश्चात -- जीव-भाव से ऊपर उठ कर स्वयं को परमात्मा में दृढ़ता से स्थित करना पड़ेगा।
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इन के लिए किसी सिद्ध, ब्रहमनिष्ठ, श्रौत्रीय (जिन्हें वेदों का ज्ञान हो) आचार्य से मार्गदर्शन प्राप्त कर उनके सान्निध्य में साधना करनी पड़ेगी। जहाँ तक मैं समझता हूँ, अन्य कोई मार्ग नहीं है। भटकाव में कुछ नहीं रखा है। आप सब को नमन !! ॐ तत्सत् !!
कृपा शंकर
२७ अप्रेल २०२१

हनुमान जी की अनुभूति ---

 हनुमान जी की अनुभूति ---

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मुझे हनुमान जी की अनुभूति कभी-कभी ध्यान में अपने मेरुदंड में होती है। परमात्मा की अनंतता से अवतरित होकर हनुमान जी अपने परम ज्योतिर्मय रूप में पता नहीं कब और कैसे मेरी सूक्ष्म देह के मेरुदंड की सुषुम्ना नाड़ी में व्यक्त होने लगते हैं। नासिका से जब साँस अंदर जाती है, तब हनुमान जी मूलाधारचक्र से बड़े प्रेम और आनंद से सब चक्रों को भेदते हुए सहस्त्रारचक्र में आ जाते हैं। कभी तो वे वहीं स्थिर हो जाते हैं, कभी सुषुम्ना में बड़े प्रेम और आनंद से विचरण कर, बापस अपनी अनंतता में विलीन हो जाते हैं। उनकी उपस्थिती बड़े प्रेम और आनंद को प्रदान करती है।
मैं उनके समक्ष नतमस्तक हूँ।
"मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं|
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये||"
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हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो सदा सफल रहे हैं, उन्होने कभी विफलता नहीं देखी। वे सेवा और भक्ति के परम आदर्श हैं।
"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥"
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ॐ तत्सत् !! ॐ स्वस्ति !!
कृपा शंकर
२७ अप्रेल २०२१