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Wednesday, 20 May 2026
ब्रह्मज्ञान का अभाव इस संसार में हमारी दुर्गति का मुख्य कारण है --- .
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Tuesday, 19 May 2026
एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।
एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।
Saturday, 16 May 2026
मैं तो फूल हूँ, मुरझा गया तो मलाल कैसा? तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....
तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....
अपने दिन का आरंभ भगवान के ध्यान से कीजिए ---
अपने दिन का आरंभ भगवान के ध्यान से कीजिए। वैसे तो पूरी गीता ही योग शास्त्र है, लेकिन उसके १५ वें अध्याय "पुरुषोत्तम योग" के आरंभिक ६ श्लोकों में योग-साधना के सारे सूत्र समाहित हैं। लेकिन वे भगवान की कृपा से ही समझ में आ सकते हैं। उन्हें बौद्धिक रूप से समझने मात्र का ही नहीं, निज जीवन में अवतरित कीजिए।
श्रीविद्या, अद्वैत-वेदान्त, और पुरुषोत्तम-योग ---
श्रीविद्या, अद्वैत-वेदान्त, और पुरुषोत्तम-योग ---
Wednesday, 13 May 2026
सीता नवमी की शुभ कामनाएँ ---
सीता नवमी की शुभ कामनाएँ ---
Monday, 11 May 2026
जिसने मुझे मेरे होने का बोध कराया, वे ही मेरे परमात्मा हैं, और वे ही यह "मैं" हूँ ---
जिसने मुझे मेरे होने का बोध कराया, वे ही मेरे परमात्मा हैं, और वे ही यह "मैं" हूँ। मैं यह देह नहीं, मेरे प्रियतम, सर्वव्यापी मेरे प्रभु के साथ एक हूँ।
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सनातन-धर्म ही भारत राष्ट्र का सत्व, मर्म, मूलाधार और प्राण है।
सनातन-धर्म ही भारत राष्ट्र का सत्व, मर्म, मूलाधार और प्राण है। सनातन-धर्म के बिना भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। सनातन-धर्म ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भविष्य है। सनातन-धर्म की निश्चित रूप से पुनर्प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
Sunday, 10 May 2026
हम अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं ?
हम अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं ?
भगवान एक छोटे और भोले-भाले बालक की तरह ही लगते हैं। पता नहीं वे इतनी बड़ी सृष्टि कैसे चला लेते हैं ?
भगवान एक छोटे और भोले-भाले बालक की तरह ही लगते हैं| पता नहीं, वे इतनी बड़ी सृष्टि कैसे चला लेते हैं? उनको डांट भी दो तो वे बुरा नहीं मानते, और लौट कर फिर बापस हँसते हुए आ जाते हैं| उन पर तरस भी आता है और उन से पूरा प्रेम भी बना रहता है| भाव जगत में वे हर बात का उत्तर भी देते हैं| कम से कम मुझे तो उनसे पूरी संतुष्टि है| एक बड़े काम की रहस्यमय बात भी उन्होने आज बताई है| उनके सर्वव्यापी ब्रह्मरूप से तो मुझे भाव जगत में उनका बालरूप ही अधिक अच्छा लगता है| भगवान उसी रूप में अच्छे लगते हैं जिनसे मित्रतावश लड़ाई-झगड़ा भी कर सकें, और जिन के साथ खेल भी सकें| उनके साथ एकत्व नहीं, उनका मित्र रूप चाहिए| ब्रह्मभाव में तो कभी भी स्थित हो सकते हैं पर उन का मित्रभाव बड़ा दुर्लभ है| आगे अब जैसी उनकी इच्छा॥ ११ मई २०२१
भगवती छिन्नमस्ता ---
भगवती छिन्नमस्ता ---
भारत में हम द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ती का उत्सव क्यों नहीं मनाते?
एक प्रश्न --- भारत में हम द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ती का उत्सव क्यों नहीं मनाते?
हृदय में परमात्मा के प्रति परमप्रेम में निरंतर वृद्धि होगी तो आगे के सारे द्वार अपने आप ही खुल जायेंगे, सारे दीप अपने आप ही जल उठेंगे; और कहीं पर भी कोई अंधकार नहीं रहेगा
हृदय में परमात्मा के प्रति परमप्रेम में निरंतर वृद्धि होगी तो आगे के सारे द्वार अपने आप ही खुल जायेंगे, सारे दीप अपने आप ही जल उठेंगे; और कहीं पर भी कोई अंधकार नहीं रहेगा
भारत जिस दिन अमेरिकी डॉलर में लेनदेन बंद कर देगा उस दिन से एक आर्थिक महाशक्ति बनना आरंभ हो जाएगा ---
भारत जिस दिन अमेरिकी डॉलर में लेनदेन बंद कर देगा उस दिन से एक आर्थिक महाशक्ति बनना आरंभ हो जाएगा ---
Tuesday, 5 May 2026
वर्तमान में जैसा वातावरण है उसमें घर पर रहकर साधना करना असम्भव तो नहीं है पर अत्यंत कष्टप्रद है ---
"सुख सम्पति परिवार बड़ाई | सब परिहरि करिहऊँ सेवकाई ||
एक अपूरणीय क्षति ---
एक अपूरणीय क्षति ---
Monday, 4 May 2026
परमात्मा ही हमारा अस्तित्व है। हम परमात्मा को कैसे प्राप्त हों?
परमात्मा ही हमारा अस्तित्व है। हम परमात्मा को कैसे प्राप्त हों?
इस लौकिक जीवन में अब मैं किसी भी तरह की वचनबद्धता का निर्वाह करने में असमर्थ हूँ ---
इस लौकिक जीवन में अब मैं किसी भी तरह की वचनबद्धता का निर्वाह करने में असमर्थ हूँ। इस जीवन में जो भी थोड़ी-बहुत ऊर्जा बची है, वह पूरी तरह से परमब्रह्म परमात्मा को समर्पित है। एकमात्र उद्देश्य है -- परमात्मा को "पूर्ण समर्पण"। घनीभूत प्राण-तत्व के रूप में जगन्माता स्वयं परमशिव की उपासना कर रही हैं। जो परमशिव हैं वे ही श्रीमद्भगवद्गीता के पुरुषोत्तम हैं, और वे ही वेदान्त के ब्रह्म हैं। उनसे अन्य कोई भी या कुछ भी नहीं है। समस्त जीवन उन्हें समर्पित है। वे कुछ भी करें। यदि कहीं कोई कमी है तो वह मेरी समझ में ही है, अन्यत्र कहीं भी नहीं। .
वैशाख पूर्णिमा ----
आज १ मई २०२६ को वैशाख पूर्णिमा है। अङ्ग्रेज़ी तिथि से १ मई का भी बहुत अधिक अंतर्राष्ट्रीय महत्व है, और हिन्दी तिथि से वैशाख-पूर्णिमा का भी बहुत अधिक अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। एक मई को तो अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है। इस दिन का बहुत बड़ा ऐतिहासिक महत्व है जिसके ऊपर कई लेख विस्तार से लिखे जा चुके हैं। सभी पूर्व साम्यवादी देशों में तो आज के दिन छुट्टी होती थी और उत्सव मनाए जाते थे। दिन में एक श्रमिक केवल ८ घंटे काम करता है, और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी होती है, यह श्रेय जाता है अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर हुए अनेक आंदोलनों की सफलता को।
गुरु रूप में दक्षिणामूर्ति शिव ---
गुरु रूप में दक्षिणामूर्ति शिव ---