सनातन-धर्म ही भारत राष्ट्र का सत्व, मर्म, मूलाधार और प्राण है। सनातन-धर्म के बिना भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। सनातन-धर्म ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भविष्य है। सनातन-धर्म की निश्चित रूप से पुनर्प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
.
हम सब जो भी आध्यात्मिक साधना करते हैं, उस से सनातन-धर्म की रक्षा होती है। जीवन की सत्य, सनातन और सर्वोत्कृष्ट अभिव्यक्ति धर्म है, और यह सनातन-धर्म ही हमारी रक्षा करेगा। हमें भी उसकी रक्षा करनी होगी।
.
हम सनातन काल से ही सदा वीर, तेजस्वी और पराक्रमी रहे हैं। हमारा लक्ष्य - परमात्मा है। सनातन-धर्म की रक्षा हेतु भारत को एक हिन्दू-राष्ट्र बनाना अपरिहार्य है।
ॐ तत्सत् !! जय हिन्दू राष्ट्र !! 






कृपा शंकर
११ मई २०२२
No comments:
Post a Comment