हमें भगवत्-प्राप्ति यानि आत्म-साक्षात्कार क्यों नहीं होता? ---
Saturday, 11 April 2026
हमें भगवत्-प्राप्ति यानि आत्म-साक्षात्कार क्यों नहीं होता? ---
निरंतर ब्रह्म-चिंतन और भक्ति मेरा स्वभाव है, अन्यथा मैं अभावग्रस्त हूँ ---
निरंतर ब्रह्म-चिंतन और भक्ति मेरा स्वभाव है, अन्यथा मैं अभावग्रस्त हूँ।
मनुष्य देह में हमारा जन्म अपने प्रारब्ध कर्मों का फल भोगने के लिए ही होता है ---
मनुष्य देह में हमारा जन्म अपने प्रारब्ध कर्मों का फल भोगने के लिए , या नए कर्मों की सृष्टि करने के लिए, या सब तरह के कर्मफलों से मुक्त होने के लिए ही होता है| जब तक संचित कर्म अवशिष्ट हैं तब तक बारंबार पुनर्जन्म होता ही रहेगा| इस निरंतर पुनरागमन से मुक्ति के लिए अहंभाव को समर्पित करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है| यह मनुष्य देह, इस देह की कामनापूर्ति के लिए नहीं मिली है| यह एक साधन है जिसका उपयोग परमात्मा की प्राप्ति के लिए ही करना चाहिए| हमने पूर्वजन्मों में मुक्तिदायक अच्छे कर्म नहीं किये इसीलिये यह जन्म लेना पड़ा| अपनी गुरू परम्परानुसार गुरू प्रदत्त साधना खूब मन लगाकर पूर्ण भक्तिभाव से करें|
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और भारत की गौरवपूर्ण परम वैभवशाली परम्परानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही नववर्ष का प्रारम्भ है|
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और भारत की गौरवपूर्ण परम वैभवशाली परम्परानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही नववर्ष का प्रारम्भ है|