Saturday, 11 April 2026

निरंतर ब्रह्म-चिंतन और भक्ति मेरा स्वभाव है, अन्यथा मैं अभावग्रस्त हूँ ---

 निरंतर ब्रह्म-चिंतन और भक्ति मेरा स्वभाव है, अन्यथा मैं अभावग्रस्त हूँ।

"शांभवी मुद्रा में पुराण-पुरुष भगवान श्रीकृष्ण स्वयं के पुरुषोत्तम रूप का ध्यान कर रहे हैं। उनसे अन्य इस सम्पूर्ण सृष्टि में कुछ भी नहीं है। सम्पूर्ण विश्व उन्हीं के परम प्रेम की अभिव्यक्ति है।"
मैं एक धर्मनिष्ठ सनातनी हिन्दू हूँ। मुझे मेरी आस्थाओं पर गर्व है। मेरा संकल्प है कि -- "सत्य सनातन धर्म की पुनःप्रतिष्ठा और वैश्वीकरण हो। भारत माँ अपने द्वीगुणित परम वैभव के साथ अखंडता के सिंहासन पर बिराजमान हों। भारत में छाया असत्य का अंधकार सदा के लिए दूर हो।"
भगवान निश्चित रूप से मेरी सुनेंगे। जो मेरे विचारों से सहमत नहीं हैं, वे विष की तरह मुझे छोड़ सकते हैं। ॐ तत् सत् ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
८ अप्रेल २०२६

No comments:

Post a Comment