Saturday, 11 April 2026

मनुष्य देह में हमारा जन्म अपने प्रारब्ध कर्मों का फल भोगने के लिए ही होता है ---

मनुष्य देह में हमारा जन्म अपने प्रारब्ध कर्मों का फल भोगने के लिए , या नए कर्मों की सृष्टि करने के लिए, या सब तरह के कर्मफलों से मुक्त होने के लिए ही होता है| जब तक संचित कर्म अवशिष्ट हैं तब तक बारंबार पुनर्जन्म होता ही रहेगा| इस निरंतर पुनरागमन से मुक्ति के लिए अहंभाव को समर्पित करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है| यह मनुष्य देह, इस देह की कामनापूर्ति के लिए नहीं मिली है| यह एक साधन है जिसका उपयोग परमात्मा की प्राप्ति के लिए ही करना चाहिए| हमने पूर्वजन्मों में मुक्तिदायक अच्छे कर्म नहीं किये इसीलिये यह जन्म लेना पड़ा| अपनी गुरू परम्परानुसार गुरू प्रदत्त साधना खूब मन लगाकर पूर्ण भक्तिभाव से करें|

ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
११ अप्रेल २०१७

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