जो साधक निरंतर परमात्मा की चेतना में रहते हैं उनका हरेक कार्य परमात्मा स्वयं करते हैं। परमात्मा का यथासंभव अधिकतम समय तक गहनतम ध्यान नित्य करें। आप सब से मिले प्रेम के लिये मैं सदा आपका आभारी हूँ। परमात्मा में सदा मैं आपके साथ एक हूँ। सहस्त्रारचक्र में और उससे भी ऊपर दिखाई दे रही ज्योति में -- गुरु-चरणों का ध्यान करें। उनके चरण-कमलों में निश्चित रूप से आश्रय मिलेगा। उनके चरण-कमल ही भगवान श्रीहरिः और भगवान परमशिव के चरण-कमल हैं। ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२० जून २०२५