Thursday, 25 June 2026

अब पूरे विश्व के सभी देशों को मिल कर चीन पर आक्रमण करना चाहिए ---

अब पूरे विश्व के सभी देशों को मिल कर चीन पर आक्रमण करना चाहिए और द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात रूस के तानाशाह जोसेफ स्टालिन की सहायता से चीन ने जिन आठ स्वतंत्र देशों पर अधिकार कर लिया था, उन को स्वतंत्र करा कर चीन को उसकी मूल सीमा में सीमित कर देना चाहिए। ये आठ देश हैं -- मंचूरिया, डोंगबेइ, इन्नर मंगोलिया, निंगशिया, गंसू, क़्वींघाई, सिंजियांग, और तिब्बत।

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चीन ने अपना विषाणु जैविक अस्त्र एक वायरस के रूप में छोड़कर सम्पूर्ण विश्व की बहुत अधिक हानि की है। उसकी मंशा थी पूरे विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को नष्ट कर पूरे विश्व पर राज्य करना।
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मुझे ऐसा लगता है कि चीन एक बहुत बड़े राक्षसी युद्ध की तैयारी कर रहा है। उसको पूरा आत्मविश्वास है कि वह एक साथ सब देशों में बीमारी फैलाकर पूरे विश्व को नष्ट कर सकता है। उसने आत्मरक्षा की भी पूरी तैयारी कर रखी है| मुझे लगता है कि उसकी मंशा पूरे विश्व की अधिकांश जनसंख्या को नष्ट कर पृथ्वी पर चीनी साम्राज्य कायम करने और बचे हुए लोगों को अपना दास बनाने की है। अब यह तो सभी देशों के राजनेताओं को ही तय करना है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं २५ जून २०२१

२५ जून १९७५ का वह काला दिन ----

 २५ जून १९७५ का वह काला दिन ---

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इदिरा गाँधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अपने विरुद्ध किये गए एक फैसले को पलटने के लिए देश में आपात्काल लगा दिया था। नेहरू खानदान की और कोंग्रेस की, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पता नहीं क्या शत्रुता थी जो सब से पहिले संघ पर ही प्रहार किया गया। संघ पर प्रतिबंध लगाकर सारे स्वयंसेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया। वे ही बच पाए जो समय पर भूमिगत हो गए थे। इस आपात्काल का सर्वाधिक विरोध और प्रतिकार भी संघ के स्वयंसेवकों ने ही किया था। जहाँ भी संघ का साहित्य मिलता उसे पुलिस द्वारा जला दिया जाता था। किसी स्वयंसेवक के घर में सब्जी काटने का चाक़ू मिलता, उस पर भी आर्म्स एक्ट लगा दिया जाता।
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सारे विरोधी दलों के नेता बंदी बना लिए गए। २६ जून को सारे समाचार पत्रों के सम्पादकीय या तो खाली थे या काली स्याही से पुते हुए थे। लोगों ने आल इंडिया रेडियो सुनना छोड़कर BBC लन्दन सुनना शुरू कर दिया था। एक स्वयंसेवक की बेटी की का विवाह था, पुलिस उसे कन्यादान से पहिले ही विवाह में से उठाकर ले गयी।
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इस तरह से बहुत अधिक अवर्णनीय अत्याचार हुए। मेरे परिचित लगभग सारे स्वयंसेवक मित्र बंदी बना लिए गए थे, जो बचे उन्होंने बाद में आन्दोलन कर के स्वयं को गिरफ्तार करवा लिया। भगवान करे वैसे दिन बापस भारत में न आयें।
भारत माता की जय॥
२५ जून २०२२