सारी साधनाएँ एक बहाना है, असली चीज तो प्रभु की कृपा है| हमारी सारी आध्यात्मिक साधनाएँ, जप-तप, योग, ध्यान, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ आदि आदि सब एक बहाना मात्र हैं| ये सब सिर्फ हमारी कमियों को दूर करती हैं, इनसे प्रभु नहीं मिलते| शरणागति भी हमारी कमियों को ही दूर करती है| उस से भी प्रभु नहीं मिलते| प्रभु तो करूणावश सिर्फ अपनी कृपा से ही मिलते हैं| उन्हें कोई बाध्य नहीं कर सकता|
Tuesday, 7 July 2026
सारी साधनाएँ एक बहाना है, असली चीज तो प्रभु की कृपा है ---
कर्ताभाव ---
कर्ताभाव ---
जीवन में हमारे भटकाव और पीड़ाओं से भगवान भी खिन्न हैं .....
अपनी संतान को दुःखी देखकर हर पिता दुःखी हो जाता है| हमारे दुःख और पीड़ाओं से भगवान भी बहुत खिन्न हैं| वे चाहते हैं कि उनकी संतान लौट कर बापस उनके पास आए, पर उनके पास कोई आना ही नहीं चाहता| सभी उनकी महाठगिनी माया से ही प्रसन्न हैं| भगवान भी कुछ नहीं कर सकते| अपने बनाए नियमों को वे नहीं तोड़ते, अन्यथा सृष्टि नहीं चलेगी| माया-मोह में दुःख ही दुःख हैं|
परमात्मा ही हमारा घर है, वहीं हम सुखी हैं, अन्यत्र कहीं भी नहीं ....
परमात्मा ही हमारा घर है, वहीं हम सुखी हैं, अन्यत्र कहीं भी नहीं ....
ध्यान गुरु-तत्व का ही करना चाहिए ----
ध्यान गुरु-तत्व का ही करना चाहिए| गुरु-तत्व का बोध भी एक दिव्य अनुभूति है जो गुरुकृपा से ही होती है| हमारी चेतना कहाँ पर है उसी के अनुसार हमारे विचार निर्मित होते हैं| गुरु महाराज का आदेश था कि चेतना को कभी आज्ञाचक्र से नीचे मत आने दो| उनके आदेश का तो पूरी तरह पालन नहीं कर पाये पर उन्होने कृपा कर के पदोन्नति कर दी| आज्ञाचक्र से वे ध्यान का केंद्रबिन्दु सहस्त्रार में, और सहस्त्रार से ब्रह्मरंध्र में कर दिया| एक दिन पाया कि चेतना ब्रह्मरंध्र से भी परे जाकर अनंताकाश में विचरण कर रही है| यह विराटता की अनुभूति उनकी परम कृपा थी| गुरुकृपा यहीं नहीं रुकी, उन्होंने उस अनंतता से भी परे का बोध करा कर सारे संदेह दूर कर दिये, और बापस इस देह की चेतना में लाकर छोड़ दिया| अब उनके बताए मार्ग पर चलना ही मेरा कर्मयोग और पुरुषार्थ है| इधर-उधर देखना भी पाप है| जय गुरु !! ॐ गुरु !!
कृपा शंकर ७ जुलाई २०२०
सारी साधनाएँ एक बहाना है, उनसे भगवान नहीं मिलते, असली चीज तो भगवान की कृपा है ---
सारी साधनाएँ एक बहाना है, उनसे भगवान नहीं मिलते, असली चीज तो भगवान की कृपा है ---
अंतरार्ष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़ा आश्चर्य -- चीन और पाकिस्तान की मित्रता है ---
अंतरार्ष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़ा आश्चर्य -- चीन और पाकिस्तान की मित्रता है। उनमें इतना अधिक वैचारिक अंतर है कि कोई समझौता हो ही नहीं सकता। फिर भी वे परम मित्र हैं। मैं तीन-चार बार चीन का भ्रमण कर चुका हूँ, वहाँ के बारे में खूब अध्ययन भी किया है, और वहाँ के बारे में काफी कुछ जानता भी हूँ। भारत में भारतीय मुस्लिम जितने सुखी हैं, उतने तो किसी मुस्लिम देश में भी नहीं हैं। मैंने अपने जीवन में विश्व के अनेक मुस्लिम देशों -- तुर्की, सऊदी अरब, मिश्र, यमन, ईरान, अबूधाबी, मोरक्को, इन्डोनेशिया, मलयेशिया और बांग्लादेश का भ्रमण किया है। वहाँ के बारे में बहुत अच्छी जानकारी है।
यह सारी सृष्टि, सारा विश्व -- भगवान विष्णु है। वे स्वयं ही यह संसार बन गए हैं ---
यह सारी सृष्टि, सारा विश्व -- भगवान विष्णु है। वे स्वयं ही यह संसार बन गए हैं ---