Tuesday, 7 July 2026

परमात्मा ही हमारा घर है, वहीं हम सुखी हैं, अन्यत्र कहीं भी नहीं ....

 परमात्मा ही हमारा घर है, वहीं हम सुखी हैं, अन्यत्र कहीं भी नहीं ....

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पता नहीं कितने जन्म हो गए हैं भटकते-भटकते| भगवान भी बहुत अधिक दुःखी हो गए हमारी पीड़ाओं और दुःख से| वे भी कब तक दुःखी रहते? करुणावश उन्होनें भी ठान ही लिया कि मेरे बिना बहुत दुखी इन सब जीवात्माओं को मुक्त करना ही है| बस! जब उन्होने ही ठान लिया है तब हमें और करना ही क्या है? कुछ भी नहीं| सारी चिंताएँ उन की, अन्य कोई तो है ही नहीं| उनका नित्य नवीन आनंद ही हमारा आनंद है| वे ही हमारी गति और हमारे घर हैं| ॐ ॐ ॐ !! कृपा शंकर ७ जुलाई २०२०

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