अंतरार्ष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़ा आश्चर्य -- चीन और पाकिस्तान की मित्रता है। उनमें इतना अधिक वैचारिक अंतर है कि कोई समझौता हो ही नहीं सकता। फिर भी वे परम मित्र हैं। मैं तीन-चार बार चीन का भ्रमण कर चुका हूँ, वहाँ के बारे में खूब अध्ययन भी किया है, और वहाँ के बारे में काफी कुछ जानता भी हूँ। भारत में भारतीय मुस्लिम जितने सुखी हैं, उतने तो किसी मुस्लिम देश में भी नहीं हैं। मैंने अपने जीवन में विश्व के अनेक मुस्लिम देशों -- तुर्की, सऊदी अरब, मिश्र, यमन, ईरान, अबूधाबी, मोरक्को, इन्डोनेशिया, मलयेशिया और बांग्लादेश का भ्रमण किया है। वहाँ के बारे में बहुत अच्छी जानकारी है।
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(१) चीनियों का मुख्य भोजन सूअर का मांस है। वे सूअर के भूने हुए मांस को चावल के साथ सब्जी की तरह मिला कर खाते हैं। पाकिस्तान में सूअर का मांस खाना हराम है।
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(२) चीन में सिंकियांग प्रांत के अलावा कहीं भी मुसलमान नहीं के बराबर हैं। वहाँ इस्लाम मजहब पर पूर्ण प्रतिबंध है। नमाज पर प्रतिबंध है, ईद मनाने पर प्रतिबंध है, मुसलमानों द्वारा दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध है, कुरान शरीफ रखने पर और मुसलमानी नाम रखने पर प्रतिबंध है। लाखों मुसलमानों को बाड़े में बंद कर के रखा हुआ है। उनको बंदूक की नोक पर सूअर का मांस खिलाया जाता है और शराब पिलायी जाती है। अब तो सबसे घृणित कार्य यह हो रहा है कि जो मुसलमान पुरुष बाड़ों में बंद हैं, उनकी बीबियों से बंदूक की नोक पर चीनी सैनिक बच्चे पैदा कर के उन की नस्ल ही बदल रहे हैं। चीन ने इस्लाम को एक मानसिक बीमारी घोषित किया हुआ है।
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किसी भी मुस्लिम देश में साहस नहीं है वे चीन का विरोध कर सकें। चीन के अनेक पुरुषों ने पाकिस्तान की गरीब मुस्लिम लड़कियों से बिना दहेज के शादी कर रखी है, और उन लड़कियों को चीन में वेश्यावृति के धंधे में धकेल दिया है। पाकिस्तान में विरोध करने का साहस नहीं है।
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रोहिंगिया मुसलमान म्यांमार के अराकान प्रदेश से आते हैं जिसकी सीमा चीन से लगी हुई है। वे शरणार्थी बनकर चीन में क्यों नहीं जाते? भारत में ही क्यों आते हैं? पाकिस्तान में भी क्यों नहीं जाते?
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सिर्फ भारत-विरोध के नाम पर चीन और पाकिस्तान परम मित्र हैं, अन्यथा उनमें कुछ भी सामान्य नहीं है। मेरा किसी से कोई विरोध नहीं है। सबके प्रति सदभावना है। सिर्फ एक वास्तविकता लिख रहा हूँ।
कृपा शंकर
७ जुलाई २०२२
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