Wednesday, 12 August 2026

सनातन धर्म और भारत, - की रक्षा होगी, वे विजयी बन कर उभरेंगे --- .

 सनातन धर्म और भारत, - की रक्षा होगी, वे विजयी बन कर उभरेंगे ---

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जब धर्म और राष्ट्र का अस्तित्व खतरे में हो, तब व्यक्तिगत मोक्ष की कामना पाप है। आध्यात्म -- सुख-भोग में नहीं है। स्वर्ग और मोक्ष-प्राप्ति हेतु की गई साधना में मेरी दृष्टि से कुछ भी आध्यात्मिक नहीं है, केवल स्वार्थ है। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जो साक्षात परमब्रह्म हैं, उन्होने बंदीगृह में ही जन्म क्यों लिया? महलों में जन्म लेने से उन्हें कौन रोक सकता था? वे तो स्वयं नारायण थे। वे एक संदेश देना चाहते थे, जो उन्होने सफलतापूर्वक दिया।
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हमारे अस्तित्व में परमात्मा होंगे तो उनकी शक्ति से धर्म व राष्ट्र की रक्षा अवश्य होगी। जब धर्म नहीं रहेगा तो राष्ट्र भी नहीं रहेगा, और राष्ट्र नहीं रहेगा तो धर्म भी नहीं बचेगा। अपना सम्पूर्ण अस्तित्व परमात्मा को समर्पित करें, उन्हें जीवन में अवतरित करें, उन्हें कर्ता बनाएँ और अपने माध्यम से उन्हें कार्य करने दें। यही सबसे बड़ी सेवा है जो हम समष्टि की कर सकते हैं। फिर परमात्मा ही हमारे माध्यम से कार्य करेंगे। हम तो उन के उपकरण मात्र बनें, यही हमारा धर्म है। जीवन में ईश्वर का साक्षात्कार ही सत्य सनातन धर्म है, जिस की सर्वाधिक अभिव्यक्ति भारत में हुई है।
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भारत के उत्थान का अर्थ है -- सनातन धर्म का उत्थान। भारत की महानता का अर्थ है -- सनातन धर्म की महानता। सनातन धर्म सत्य है क्योंकि यह अपने उपासकों का प्रत्यक्ष साक्षात्कार परमात्मा से कराता है। सत्य का वास्तविक आग्रह यही धर्म करता है। सत्य ही परमात्मा है। ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१२ अगस्त २०२१

साधना में सफलता -- भगवान की विशेष परम कृपा पर ही निर्भर है।

साधना में सफलता -- भगवान की विशेष परम कृपा पर ही निर्भर है। यह कोई mechanical नहीं है। हम भगवान पर कोई अहसान यानि उपकार नहीं कर रहे हैं कि हमने इतने जप-तप, पूजा-पाठ और पुरश्चरण आदि किए हैं, अतः हमारी मांगें पूरी करो। हम भगवान से मांग नहीं, विनम्र प्रार्थना ही कर सकते हैं।

भगवान की कृपा प्रत्यक्ष भी हो सकती है और गुरु के माध्यम से भी हो सकती है। भगवान से कोई मांग करनी ही नहीं चाहिए। उनके प्रेम के अलावा अन्य कुछ मांगना भी नहीं चाहिए। उनको सब पता है कि हमारी क्या आवश्यकता है।
हमारे शास्त्र परमप्रेम और शरणागति की बात कहते हैं। प्रेम में कोई मांग या शर्त नहीं होती। मांग और शर्त तो व्यापार में होती है। अतः हमारी भक्ति Unconditional हो।


गुरु का उपकार उतारने का एक ही तरीका है कि हम आत्म-साक्षात्कार द्वारा मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि परमात्मा को स्वयं में पूर्ण रूप से अवतरित/व्यक्त करें।

 गुरु का उपकार उतारने का एक ही तरीका है कि हम आत्म-साक्षात्कार द्वारा मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि परमात्मा को स्वयं में पूर्ण रूप से अवतरित/व्यक्त करें।

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गुरु का एक ही लक्ष्य होता है कि शिष्य को परमात्मा की प्राप्ति हो। गुरु के उपदेशों का पालन ही गुरु की वास्तविक सेवा है। गुरुकृपा से ही साधना के गूढ़ से गूढ़ रहस्य अनावृत होते हैं। उन्हीं की कृपा से भक्ति की जागृति और ज्ञान का उदय होता है। उन्हीं की कृपा से प्राणवायु का सुषुम्ना में प्रवेश, कुंडलिनी जागरण, चक्रभेद, नाद, कूटस्थ ब्रह्मज्योति, सूक्ष्म जगत, अनंताकाश और परमशिव आदि का अनुभूतिजन्य ज्ञान और भगवत्-प्राप्ति होती है।
हम अपने सद्गुरु और परमात्मा के साथ एक हों। कहीं कोई भेद न रहे।
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ॐ तत्सत् !! ॐ गुरु !! जय गुरु !!
कृपा शंकर
१२ अगस्त २०२१