Wednesday, 12 August 2026

गुरु का उपकार उतारने का एक ही तरीका है कि हम आत्म-साक्षात्कार द्वारा मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि परमात्मा को स्वयं में पूर्ण रूप से अवतरित/व्यक्त करें।

 गुरु का उपकार उतारने का एक ही तरीका है कि हम आत्म-साक्षात्कार द्वारा मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि परमात्मा को स्वयं में पूर्ण रूप से अवतरित/व्यक्त करें।

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गुरु का एक ही लक्ष्य होता है कि शिष्य को परमात्मा की प्राप्ति हो। गुरु के उपदेशों का पालन ही गुरु की वास्तविक सेवा है। गुरुकृपा से ही साधना के गूढ़ से गूढ़ रहस्य अनावृत होते हैं। उन्हीं की कृपा से भक्ति की जागृति और ज्ञान का उदय होता है। उन्हीं की कृपा से प्राणवायु का सुषुम्ना में प्रवेश, कुंडलिनी जागरण, चक्रभेद, नाद, कूटस्थ ब्रह्मज्योति, सूक्ष्म जगत, अनंताकाश और परमशिव आदि का अनुभूतिजन्य ज्ञान और भगवत्-प्राप्ति होती है।
हम अपने सद्गुरु और परमात्मा के साथ एक हों। कहीं कोई भेद न रहे।
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ॐ तत्सत् !! ॐ गुरु !! जय गुरु !!
कृपा शंकर
१२ अगस्त २०२१

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