भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है। राजस्थान की भूमि तो भक्ति और आस्था का संगम है। यहाँ के लोगों के स्वभाव में भगवान की बहुत गहरी भक्ति है, बस कोई जगाने वाला चाहिये।
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झुंझुनूं जिले की अरावली पर्वतमाला के लोहार्गल तीर्थ में ढाई हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मालकेत पर्वत की आराधना भगवान विष्णु के रूप में होती है। इस पर्वत की परिक्रमा सात दिन में पूरी होती है। मार्ग में सात कुंड है जिनमें सात झरने हैं। यह २४ कौसीय परिक्रमा पूरे राजस्थान में होने वाली सबसे बड़ी परिक्रमा है जो लोहार्गल तीर्थ से संत महात्माओं के नेतृत्व में ठाकुर जी की पालकी के साथ गोगानवमी (भाद्रपद कृष्ण नवमी) के दिन आरम्भ होकर भाद्रपद अमावस्या के दिन लोहार्गल तीर्थ में ही बापस आकर समाप्त हो जाती है। इस सात दिवसीय चौबीस कौसीय परिक्रमा में हर वर्ष सात से नौ लाख श्रद्धालु पूरे भारत से आकर भाग लेते हैं। अरावली पर्वत माला की घाटियों में यह यात्रा अति मनोरम होती है। अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ पदयात्रियों की हर सुविधा का ध्यान रखती हैं।
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कल भाद्रपद अमावस्या के दिन ही हमारे यहाँ के सभी सती मंदिरों में मुख्य आराधना होगी। झुंझुनूं के विश्व प्रसिद्ध श्रीराणीसती दादीजी के मंदिर में भी मुख्य आराधना कल होगी। ये सभी सतियाँ महान वीरांगणाएँ थीं जिन्होंने धर्मारक्षार्थ युद्धभूमि में स्वयं युद्ध किया और स्वतः प्रकट हुए अपने तेज से सती हुईं। इस दिन का वातावरण कुछ अलग ही होता है।
आप सब को नमन ! ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२२ अगस्त २०२५