Tuesday, 29 September 2026

दुर्गावाहिनी और राष्ट्र सेविका समिति द्वारा की जाने वाली प्रार्थनाएं -----

 (दुर्गावाहिनी संगठन की बहिनों द्वारा की जाने वाली नित्य प्रार्थना)

"अये देवी दुर्गे महाशक्ति रुपे, महामंगले वत्सले मातृभूमे |
त्वमेका भवानी त्वमेका शरण्या, विधात्र्ये शिवाये नमस्ते नमस्ते ||
त्वया प्रेरिताः स्मो वयं वीरबालाः, शुभं कर्म कर्तुम विजेतुं रणं च |
स्वदेशे विदेशे सुकार्य विकिर्य, सदाचार वृत्ति वयं स्थापयाम ||
श्रुति शीलतामानति सत्प्रवृतिम्, दयाभावनामेकतामात्मशक्तिम् |
इमः साधिकः यच्छ चास्मतकृते त्वं, यतो भारते सन्तु नार्यम् समर्थः ||
सदा रक्षीतुम् हिन्दूधर्म वरेण्यं, निहंतुं खलां साधुवृत्तं च पातुम् |
समुन्नेतुमेतद् वरं हिन्दूराष्ट्रं, जये पुण्यभूमे शुभे देहि शक्तिम् ||"
दुर्गा माता की जय ! भारत माता की जय !
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(राष्ट्रसेविका समिति की बहिनों द्वारा की जाने वाली नित्य प्रार्थना)
"नमामो वयं मातृभूः पुण्यभूस्त्वाम् , त्वया वर्धिताः संस्कृतास्त्वत्सुताः |
अये वत्सले मङ्गले हिन्दुभूमे, स्वयं जीवितान्यर्पयामस्त्वयि ।।१।।
नमो विश्वशक्त्यै नमस्ते नमस्ते, त्वया निर्मितं हिंदुराष्ट्रं महत् |
प्रसादात्तवैवात्र सज्जाः समेत्य, समालंबितुं दिव्यमार्गं वयम् ।।२।।
समुन्नामितं येन राष्ट्रं न एतत् , पुरो यस्य नम्रं समग्रं जगत् |
तदादर्शयुक्तं पवित्रं सतीत्वम् , प्रियाभ्यः सुताभ्यः प्रयच्छाम्ब ते ।।३।।
समुत्पादयास्मासु शक्किं सुदिव्याम् , दुराचार-दुर्वृत्ति-विध्वंसिनीम्
पिता-पुत्र-भ्रातृंश्च भर्तारमेवम् , सुमार्गं प्रति प्रेरयन्तीमिह ।।४।।
सुशीलाः सुधीराः समर्थाः समेताः, स्वधर्मे स्वमार्गे परं श्रद्धया |
वयं भावि-तेजस्वि-राष्ट्रस्य धन्याः, जनन्यो भवेमेति देह्याशिषम् ।।५।।
।। भारत माता की जय ।।

सुख और आनंद में क्या अंतर है?

 किसी मित्र ने पूछा है कि सुख और आनंद में क्या अंतर है? उसी के उत्तर में यह लिखा है ---

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जो भौतिक, प्राणिक, व मानसिक स्तर पर है, वह सुख है। जो आत्मा के स्तर पर है, वह आनंद है।
"ख" शब्द आकाश-तत्व है। "खं" ब्रह्म को कहते हैं। ब्रह्म सर्वव्यापी है। जो ब्रह्म के जितना समीप है, वह उतना ही सुखी है। जो ब्रह्म से जितना दूर है, वह उतना ही दुःखी है। ब्रह्म से एक होने की अनुभूति आनंद है।
🕉️ नमो नारायण!!
२९ सितंबर २०२४