Sunday, 11 October 2026

पितृ विसर्जन

 तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः !!

सर्वपितृ अमावस्या के दिन आत्म-प्रेरणा से आज सम्मानपूर्वक सब पितरों की विदाई (पितृ विसर्जन) कर दी। कोई बड़ा आडंबर नहीं किया, श्रद्धाभाव से घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर सरसों के तेल का चौमुखी दीया जला कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके एक लोटे जल में थोड़े से काले तिल मिलाकर पित्तरों को अर्घ्य दिया; और दोनों हाथ उठाकर पितरों से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए उन्हें आदरपूर्वक विदा किया। जैसी भी प्रेरणा मिली, वैसा ही किया। इससे अधिक का ज्ञान भी तो नहीं है।

गरबा नृत्य ---

 गरबा नृत्य ---

भगवती महाकाली और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का नृत्य है जो एक दीपक (गर्भ दीप) जलाकर उसके चारों ओर किया जाता है। इसमें पूर्ण भक्तिभाव से केवल भजन ही गाये जाते हैं। इसका आरंभ 15 वीं शताब्दी में हरिवंश पुराण में वर्णित 'ताल रासक' एवं 'दंड रासक' से मिली प्रेरणा से हुआ। इसका वर्तमान स्वरूप तो एक विकृति मात्र है।