मोहनदास करमचंद गाँधी की पुण्यतिथि पर मैं गांधी को और पुणे व पुणे के आसपास के उन छः हज़ार से अधिक निर्दोष ब्राह्मणों को श्रद्धांजलि देता हूँ, जिनकी हत्या गाँधीवध की प्रतिक्रया स्वरुप अगले तीन दिनों में कर दी गयी थीं। पुणे की गलियों में चारपाई डालकर सो रहे निर्दोष ब्राह्मणों पर किरोसिन तेल डालकर उन्हें जीवित जला दिया गया। पुणे में ब्राह्मणों को घरों से निकाल निकाल कर सड़कों पर घसीट घसीट कर उनकी सामूहिक हत्याएँ की गईं। उस घटना की कोई जाँच नहीं हुई और घटना को दबा दिया गया। उन ब्राह्मणों का दोष इतना ही था कि नाथूराम गोड़से एक ब्राह्मण थे, और वह भी पुणे के।
Wednesday, 18 March 2026
मोहनदास करमचंद गाँधी की पुण्यतिथि ---
राष्ट्र की वर्तमान दशा में हम अपना सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं? हमारी जाति और धर्म क्या है?
राष्ट्र की वर्तमान दशा में हम अपना सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं? हमारी जाति और धर्म क्या है?
(१) समाज में "वर्ग-संघर्ष" नहीं, "वर्ग-सहयोग", "सामाजिक-समरसता" और "देशभक्ति" की भावना प्रबलतम होनी चाहिये। (२) भारत में जनतंत्र के स्थान पर राजतन्त्र की स्थापना हो सकती है।
(१) समाज में "वर्ग-संघर्ष" नहीं, "वर्ग-सहयोग", "सामाजिक-समरसता" और "देशभक्ति" की भावना प्रबलतम होनी चाहिये।
परमात्मा में निरंतर रमण करते हुए हम परमात्मा में ही स्थित हों ---
परमात्मा में निरंतर रमण करते हुए हम परमात्मा में ही स्थित हों ---
"निमित्त मात्रं भव सव्यसाचिन्" ---
उपासना में हम कर्ताभाव से मुक्त होकर एक साक्षीमात्र बनें। साधना तो जगन्माता स्वयं करती हैं और सारे कर्मफल परमशिव को अर्पित करती हैं। एकमात्र कर्ता वे स्वयं हैं। हम तो एक निमित्त मात्र हैं। दूसरे शब्दों में महाकाली सारी साधना स्वयं करते हुए सारे कर्मफल श्रीकृष्ण को अर्पित करती हैं।
आजकल ब्राह्मणों पर हो रहे प्रहार वास्तव में सनातन धर्म पर प्रहार हैं ---
आजकल ब्राह्मणों पर हो रहे प्रहार वास्तव में सनातन धर्म पर प्रहार हैं। ब्राह्मणों की संस्था यदि नष्ट हो गयी तो सनातन धर्म भी नष्ट हो जाएगा। सनातन धर्म यानि हिन्दुत्व को जो नष्ट करना चाहते हैं, वे हैं -- ईसाईयत, इस्लाम, मार्क्सवाद, पूरी पश्चिमी सभ्यता, नास्तिकतावाद और आधुनिकतावाद।
.पेरियार के अनुयायियों द्वारा तमिलनाडु से सारे ब्राह्मण भगा दिये गये थे, आज बंगाल से भगाये जा रहे हैं। तमिलनाडु की सरकार हिन्दुत्व को ही एक छूत की बीमारी बता रही है। कांग्रेस तो ब्राह्मणद्रोही थी ही, वर्तमान भाजपा सरकार भी ब्राह्मणद्रोही हो गयी है। भाजपा के सबसे अधिक समर्थक ही ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग हैं।
लेकिन सनातन धर्म को भगवान नष्ट नहीं होने देंगे। सनातन धर्म भारत की अस्मिता है। जितने प्रहार उस पर हो रहे हैं, उसका दस लाखवां भाग जितना आक्रमण भी किसी अन्य सभ्यता पर होता तो वह सभ्यता अब तक नष्ट हो गयी होती।
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भारत के हिन्दू समाज में ब्राह्मण सबसे अधिक कमजोर, दरिद्र और अति पिछड़ा वर्ग है। सबसे अधिक गरीबी ब्राह्मणों में है। उन्हें नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हें नष्ट करना भी सबसे आसान है, क्योंकि धर्मशिक्षा के अभाव में वे दिशाहीन हो गये हैं।
कृपा शंकर
८ फरवरी २०२६
आध्यात्म में साधक कौन है? साध्य क्या है? और साधना क्या होती है? ---
आध्यात्म में साधक कौन है? साध्य क्या है? और साधना क्या होती है?
भारत को एक ब्रह्मतेज (ब्रह्मशक्ति) की आवश्यकता है ---
मैंने अनेक वर्षों पूर्व एक बात कही थी कि भारत को एक ब्रह्मतेज (ब्रह्मशक्ति) की आवश्यकता है। वह आवश्यकता अभी तो तुरंत है और भविष्य में भी सदा ही रहेगी। अनेक साधकों की एक गहन और समर्पित आध्यात्मिक साधना और पराविद्याओं के ज्ञान से ब्रह्मतेज जागृत होगा, केवल बातों से नहीं। ब्रह्मतेज जागृत होगा तो क्षात्रतेज भी जागृत होगा। भारत को ब्रह्मतेज़ और क्षात्रतेज दोनों की ही तुरंत आवश्यकता है। पराविद्या ही मनुष्य को भौतिक बंधनों से मुक्त कर सकती है।
महाशिवरात्रि के त्योहार की तैयारी अभी से करें। महाशिवरात्रि की अग्रिम मंगलमय शुभ कामनाएँ ---
महाशिवरात्रि के त्योहार की तैयारी अभी से करें। महाशिवरात्रि की अग्रिम मंगलमय शुभ कामनाएँ ---
मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि "आत्म-साक्षात्कार" है ---
मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि "आत्म-साक्षात्कार" है ---
.संक्षेप में यानि कम से कम शब्दों में आज मैं उस विषय पर बात कर रहा हूँ जो मेरे अब तक के समस्त अनुभवों और अर्जित ज्ञान का सार है। उसी में तल्लीन और तन्मय होकर अवशिष्ट जीवन परमात्मा को समर्पित है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कहते हैं --
"एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति।
स्थित्वाऽस्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति॥२:७२॥"
अर्थात् - " हे पार्थ यह ब्राह्मी स्थिति है। इसे प्राप्त कर पुरुष मोहित नहीं होता। अन्तकाल में भी इस निष्ठा में स्थित होकर ब्रह्मनिर्वाण (ब्रह्म के साथ एकत्व) को प्राप्त होता है॥"
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मनुष्य जीवन की उच्चतम उपलब्धि "आत्म-साक्षात्कार" (Self-Realization) यानि "ब्रह्म" (Ultimate Reality) के साथ एकत्व की अनुभूति है। यह उच्चतम स्थिति है जिसे "तुरीय चेतना" भी कहते हैं। यह विशुद्ध जागरूकता की स्थिति है जिसमें हम इस सत्य को अनुभूत करते हैं कि हम यह अन्तःकरण (मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार) नहीं, बल्कि एक साक्षी आत्मा हैं। अंततः यह साक्षी भाव भी तिरोहित हो जाता है। हम स्वयं ब्रह्ममय हो जाते हैं।
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ध्यान, मौन, भक्ति और समर्पण -- ये मार्ग हैं, जो हमें वीतरागता, स्थितप्रज्ञता, और समत्व में स्थित करते हैं। इस अवस्था यानि स्थिति में व्यक्ति को किसी भी तरह का कोई मोह या भ्रम नहीं रहता। सुख-दुःख, लाभ-हानि जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी साधक विचलित नहीं होता।
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इस आलेख का उद्देश्य कम से कम शब्दों में परम सत्य को व्यक्त करना है। इस का विस्तार श्रीमद्भगवद्गीता और सारे उपनिषद हैं।
ॐ ऐं गुरुभ्यो नमः॥ ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
११ फरवरी २०२६
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान का हरिःहर रूप ---
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान का हरिःहर रूप ---
शिवरात्रि की मंगलमय अनंत शुभ कामनाएं ---
शिवरात्रि की मंगलमय अनंत शुभ कामनाएं ---
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जो इसी जीवन में भगवत्-प्राप्ति करना चाहते हैं, ऐसे सत्यनिष्ठ मुमुक्षु ही मेरे मित्र-संकुल में रहें ---
जो इसी जीवन में भगवत्-प्राप्ति करना चाहते हैं, ऐसे सत्यनिष्ठ मुमुक्षु ही मेरे मित्र-संकुल में रहें। भगवान मिलें या न मिलें, यह उनकी समस्या है। हमारा कार्य तो उनका उपकरण बनकर उनके प्रकाश का निरंतर विस्तार करना है। इसके लिए भक्ति, योग व तंत्र आदि सभी साधन उपलब्ध हैं।
कर्ता कौन है? हम ईश्वर को कैसे प्राप्त हों? हमारी क्या पात्रता हो?
गीता में भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार इस सृष्टि में तीनों गुणों से अतिरिक्त अन्य कोई भी कर्ता नहीं है। ईश्वर त्रिगुणातीत है, अतः ईश्वर से जुड़कर ही हम निस्त्रेगुण्य हो सकते हैं। यही अमृतत्व को प्राप्त करने का मार्ग है। पर यह कैसे संभव हो? भगवान इसका मार्ग बताते हैं --
राष्ट्र हित में वर्तमान केंद्र सरकार से २ मुद्दों पर हमारी असहमति है ---
राष्ट्र हित में वर्तमान केंद्र सरकार से २ मुद्दों पर हमारी असहमति है। यदि इनका समाधान नहीं हुआ तो अगले चुनावों में भाजपा की, और स्वयं प्रधानमंत्री की चुनावी पराजय सुनिश्चित है।