शक्ति का स्थूल और सूक्ष्म रूप ---
Wednesday, 14 October 2026
शक्ति का स्थूल और सूक्ष्म रूप ---
Tuesday, 13 October 2026
जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ ---
जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ ---
Sunday, 11 October 2026
पितृ विसर्जन
तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः !!
गरबा नृत्य ---
गरबा नृत्य ---
Sunday, 4 October 2026
अति उलझन भरे प्रश्न और विचार --- .
अति उलझन भरे प्रश्न और विचार ---
मैं भाजपा और संघ से तटस्थ व उदासीन क्यों हो गया हूँ ?
भारतीय जनता पार्टी जब तक आदरणीय डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं.दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चल रही थी तब तक मैं भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का कट्टर समर्थक था। अब जब से पार्टी ने उन्हें छोड़कर भीमराव रामजी सकपाल उर्फ डॉ.भीमराव रामजी अंबेडकर का अनुसरण करना आरंभ कर दिया है जिन्हें वे बाबा साहब डॉ.अंबेडकर कहते हैं; मैं तटस्थ हो गया हूँ, और कोई अन्य विकल्प देख रहा हूँ।
अब नेहरू-गांधी का युग समाप्त हो गया है।
अब नेहरू-गांधी का युग समाप्त हो गया है। आजकल अंबेडकर का जमाना है। जीवन में सफलता के लिए उनकी पूजा आजकल की जाती है। कल को कोई और आ जाएगा।
Tuesday, 29 September 2026
दुर्गावाहिनी और राष्ट्र सेविका समिति द्वारा की जाने वाली प्रार्थनाएं -----
(दुर्गावाहिनी संगठन की बहिनों द्वारा की जाने वाली नित्य प्रार्थना)
सुख और आनंद में क्या अंतर है?
किसी मित्र ने पूछा है कि सुख और आनंद में क्या अंतर है? उसी के उत्तर में यह लिखा है ---
Tuesday, 25 August 2026
अगले दो-तीन वर्षों में अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था विफल हो जायेगी, और अमेरिका एक महाशक्ति नहीं रहेगा।
अगले दो-तीन वर्षों में अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था विफल हो जायेगी, और अमेरिका एक महाशक्ति नहीं रहेगा।
Sunday, 23 August 2026
श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है|
श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है| भारत की वर्तमान समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए अरविन्द के इन शब्दों को समझना आवश्यक है|
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें।
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें। वे ही नारायण हैं, वे ही पुरुषोत्तम हैं, और वे ही परमशिव हैं। इसके लिए हमें वीतराग यानि राग-द्वेष और अहंकार से तो मुक्त तो होना ही होगा। यह आरंभिक लक्ष्य है।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है - --
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है। मुझे मेरी सब कमियों का पता है, लेकिन उनके समक्ष मैं असहाय हूँ। भगवान से मैंने प्रार्थना की तो भगवान ने कहा कि अपने सब शत्रु मुझे सौंप दो, लेकिन उनसे पहले स्वयं को (यानि अपने को) मुझे (यानि भगवान को) अर्पित करना होगा। स्वयं को अर्पित करने में बाधक है मेरा लोभ और अहंकार, यानि कुछ होने का और खोने का भाव।
Saturday, 22 August 2026
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है ---
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है। राजस्थान की भूमि तो भक्ति और आस्था का संगम है। यहाँ के लोगों के स्वभाव में भगवान की बहुत गहरी भक्ति है, बस कोई जगाने वाला चाहिये।
Tuesday, 18 August 2026
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता" ---
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता"| इस स्वधर्म की रक्षा का अनवरत प्रयास ही मेरी दृष्टि में आध्यात्म है, अन्य कुछ भी नहीं| आध्यात्म कोई व्यक्तिगत मोक्ष, सांसारिक वैभव, इन्द्रीय सुख या अपने अहंकार की तृप्ति की कामना का प्रयास नहीं है| यह कोई दार्शनिक वाद विवाद या बौद्धिक उपलब्धी भी नहीं है| साथ साथ सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों का विनाश भी हमारा लौकिक धर्म है|
जाने कहाँ गये वो दिन
जीवन में आमूलचूल परिवर्तन भी पीड़ा देता है। जो कुछ भी जीवन में मैंने देखा, वह सारा परिदृश्य ही बदल गया है। पुराने लोग ऊपर चले गए। बड़े बड़े शानदार भवन सूने होकर खंडहर होने लगे हैं। सारे शत्रु-मित्र पता नहीं कहाँ चले गए। बड़े-बड़े राजसी महल, बड़ी-बड़ी हवेलियाँ, अब सुनसान और खंडहर हो रही हैं। कभी ये भी बहुत शानदार थीं, और बड़े-बड़े शानदार लोग इनमें भी रहते थे। हमारी दो सौ वर्ष पुरानी पारिवारिक हवेली जो कभी बहुत शानदार थी, अब देखभाल के अभाव में खंडहर हो रही है, जिसे देखकर पीड़ा होती है। इतने विभाजन हो गए हैं कि मरम्मत करवाए तो भी कौन? हमारे पूर्वजों की छह-सात पीढ़ियाँ उसमें रही हैं। मेरा भी बचपन, किशोरावस्था और यौवन का कुछ भाग उसी में बीता है।
अफीम के उत्पादन और उपयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो और भी अधिक कठोर होना चाहिए।
अफीम के उत्पादन और उपयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो और भी अधिक कठोर होना चाहिए। दर्दनाशक और अवसाद-मुक्ति की दवाइयों के निर्माण के लिए अफीम की आवश्यकता पड़ती है, जिसके उत्पादन के लिए किसानों को सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है। बिना लाइसेंस के अफीम उगाना एक अपराध है जिसमें जमानत भी नहीं होती।
दान-पुण्य से उत्तम गति तो प्राप्त होती है, पर जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता। परमात्मा को पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ी साधना है।
दान-पुण्य से उत्तम गति तो प्राप्त होती है, पर जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता। परमात्मा को पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ी साधना है। गीता में भगवान कहते हैं --
विश्व की स्थिति बड़ी विचित्र है।
विश्व की स्थिति बड़ी विचित्र है। यहाँ मैं अपनी आंतरिक अनुभूतियाँ ही लिख रहा हूँ जो विश्व की वर्तमान घटनाओं का मेरा विश्लेषण है। कोई आवश्यक नहीं है कि इससे कोई सहमत ही हो। मैं जो लिख रहा हूँ, किसी की भावनाओं को आहत किए बिना मेरा अभिव्यक्ति का अधिकार है।
कर्ता कौन है? ---
सारी सृष्टि, सारे सूर्य-चन्द्र, ग्रह-नक्षत्र, सब एक नियम से चल रहे हैं। पृथ्वी नियमित रूप से अपने सूर्य की परिक्रमा कर रही है। अग्नि की लपट ऊपर की ओर, व जल की गति नीचे की ओर है। वायु अपनी ही चाल से चलती है। इस देह में रक्त का संचार हो रहा है, बाल और नाखून अपने आप बढ़ रहे हैं, भूख-प्यास व सर्दी-गर्मी लग रही है, शरीर की सारी क्रियाएँ अपने आप हो रही हैं। अपने आप ही अनेक तरह की वासनाओं का जन्म होता है। जीवन में सुख-दुःख की अनुभूतियाँ होती हैं। तरह तरह की स्पृहाओं/आकांक्षाओं व प्रेम और अभीप्सा का जन्म होता है। नित्य इतने लोगों का जन्म और मृत्यु होती है। इन सब का कर्ता कौन है? मैं कौन हूँ? कभी इन पर भी विचार करो, जीवन धन्य होगा।
सनातन धर्म अभी भी जीवित क्यों है? ---
सनातन धर्म अभी भी जीवित क्यों है? ---
Monday, 17 August 2026
अब और अधिक समय मिलेगा भगवान की उपासना (भक्ति) के लिए ---
अब और अधिक समय मिलेगा भगवान की उपासना (भक्ति) के लिए ---