Saturday, 20 June 2026
जो साधक निरंतर परमात्मा की चेतना में रहते हैं उनका हरेक कार्य परमात्मा स्वयं करते हैं ---
Wednesday, 17 June 2026
आध्यात्मिक मार्ग पर हम सब की सबसे बड़ी बाधा — "लोकेषणा" है।
लोकेषणा -- एक मरीचिका और भटकाव ही है
लोकेषणा (संसार में यश, प्रसिद्धि और दूसरों से प्रशंसा की चाह) -- एक मरीचिका और भटकाव ही है। इससे अहंकार ही पुष्ट होता है, कोई तृप्ति नहीं मिलती। तृप्ति - सिर्फ भगवान की उपासना में है, अन्यत्र कहीं भी नहीं। सभी विषयों में अनासक्त व्यक्ति ही परम सिद्ध हो सकता है।
Tuesday, 16 June 2026
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है ।
हठयोग पर जो भी उपलब्ध साहित्य है उसमें सबसे मुख्य "घेरण्ड संहिता" है| इस पर प्रामाणिक और सबसे अच्छा ज्ञान "बिहार स्कूल ऑफ योगा" मुंगेर (बिहार) के आचार्य स्वामी निरंजनानन्द ने दिया है| उन्होने घेरण्ड संहिता पर भाष्य और अन्य अनेक प्रामाणिक पुस्तकें लिखी हैं| उनके सन्यासी व अन्य शिष्य हठयोग का प्रामाणिक ज्ञान पूरे विश्व में दे रहे हैं| घेरण्ड मुनि का समय विवादास्पद है| अंग्रेज़ इतिहासकार उन्हें १७वीं शताब्दी का बताते हैं जो अविश्वसनीय है| घेरण्ड संहिता में सात अध्याय हैं जो निम्न विषयों पर प्रकाश डालते हैं .... षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, प्राणायाम, ध्यान, और समाधि|
ध्यान ---
ध्यान :--- आज्ञा चक्र में एक प्रकाश की कल्पना करें जो समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त है| पूरा ब्रह्मांड उसी प्रकाश के घेरे में है| फिर यह भाव करें कि "मैं स्वयं ही वह प्रकाश हूँ, यह देह नहीं"।
Wednesday, 10 June 2026
भगवान का भक्त कभी नष्ट नहीं होता --
जीवन में कभी भी विपरीत परिस्थितियाँ और संकट काल अचानक ही आ सकते हैं, जिन में जीवित रहने हेतु भगवान की कृपा होना आवश्यक है। भगवान भी श्रद्धालुओं की ही रक्षा करते हैं, जो उन को अपना मन, बुद्धि, चित्त, और अहंकार समर्पित कर देते हैं। भगवान का भक्त कभी नष्ट नहीं होता --
Tuesday, 9 June 2026
ब्राह्मण समाज में जागृति और एकता कैसे हो? ---
ब्राह्मण समाज में जागृति और एकता कैसे हो?
भारत का भविष्य "धर्म-सापेक्षता" में है, 'धर्म-निरपेक्षता" में नहीं ---
भारत का भविष्य "धर्म-सापेक्षता" में है, 'धर्म-निरपेक्षता" में नहीं। धर्म-निरपेक्षता का अर्थ है -- अधर्म-सापेक्षता। भारत की अस्मिता "सनातन-धर्म" है। भारत कोई भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं, एक जीवंत सूक्ष्म सत्ता है। वास्तव में सनातन धर्म ही भारत है, और भारत ही सनातन धर्म है। सनातन धर्म का उत्थान ही भारत का उत्थान है, और सनातन धर्म का पतन ही भारत का पतन है। धर्म का पालन ही धर्म की रक्षा है।
Saturday, 6 June 2026
शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक
आज ही के दिन ६ जून १६७४ को रायगढ़ में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था जो भारतीय इतिहास की एक गौरवशाली गाथा है| महान विजयनगर साम्राज्य के बाद पहली बार भारत में स्वराज्य की स्थापना हुई| शिवाजी का राज्याभिषेक काशी के वेद-पुराण-उपनिषदों के ज्ञाता पंडित गंगाधर भट्ट द्वारा किया गया| पंडित गंगाधर भट्ट ने शिवाजी की वंशावली के विस्तृत अध्ययन के बाद यह सिद्ध किया के उनका भोंसले वंश मूलतः मेवाड़ के वीरश्रेष्ठ सिसोदिया राजवंश की ही एक शाखा है| शिवाजी मूल रूप से सिसोदिया राजपूत थे| उन के पूर्वज मेवाड़ से महाराष्ट्र जाकर बस गए थे| (नेपाल का राजवंश भी सिसोदिया राजपूत ही है). गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक, क्षत्रिय कुलगौरव, राजाधिराज, योगीराज श्री श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की जय !
Thursday, 4 June 2026
"परम प्रेम" और "समर्पण" का स्वभाव हमें अपने "शिवत्व" का बोध कराता है .....
"परम प्रेम" और "समर्पण" का स्वभाव हमें अपने "शिवत्व" का बोध कराता है .....
सेक्युलरिज्म (धर्म निरपेक्षता) का जन्म कैसे हुआ ? .....
सन १८५१ ई.में इंग्लैंड के राजा हेनरी आठवें को अपनी पत्नी को तलाक देना था जिसके लिए पॉप की अनुमति आवश्यक थी| पॉप ने वह अनुमति नहीं दी| इसलिए पॉप के आदेश को ठुकराने के लिए इंग्लेंड में धर्मनिरपेक्षता यानि सेकुलरिज्म का सिद्धांत बनाया गया जिसके अंतर्गत इंग्लैंड का राजा पॉप के आदेश को मानने केलिए बाध्य नहीं था| सेकुलर का मतलब है चर्च के आदेश को नहीं मानने वाला| हम आज उन्हीं अंग्रेजों की नक़ल कर के सेकुलर बन रहे हैं|
"यथा ब्रज गोपिकानाम्" ----
"यथा ब्रज गोपिकानाम्" ----
Wednesday, 3 June 2026
मैं जड़-चेतन और यह सारी सृष्टि हूँ। केवल मैं हूँ। ---
मैं जड़-चेतन और यह सारी सृष्टि हूँ। केवल मैं हूँ। मैं ही परमब्रह्म परमशिव और विष्णु हूँ। मुझसे अन्य कोई या कुछ भी नहीं है।
"आनन्द सिन्धु मध्य तव वासा, बिनु जाने तू मरत पियासा" ---
"आनन्द सिन्धु मध्य तव वासा, बिनु जाने तू मरत पियासा" ---
Tuesday, 2 June 2026
भगवान की भक्ति से क्या मिलेगा? --- -- (संशोधित व पुनःप्रेषित लेख) .
भगवान की भक्ति से क्या मिलेगा? --- -- (संशोधित व पुनःप्रेषित लेख)
कोई भी आध्यात्मिक साधना हो या कोई भी आस्था --- उसके औचित्य का एक ही मापदंड है -- "परमात्मा की अनुभूति" ---
कोई भी आध्यात्मिक साधना हो या कोई भी आस्था --- उसके औचित्य का एक ही मापदंड है -- "परमात्मा की अनुभूति"। आप किसी भी मार्ग पर चल रहे हों, यदि आपको दिव्य प्रेम, आनंद, और परमात्मा की निरंतर अनुभूति होती है तो वह मार्ग सही है; अन्यथा गलत। हमारा लक्ष्य केवल परमात्मा है।
Saturday, 30 May 2026
कुर्द जाति क्या मूल रूप से हिन्दू है?
कुर्द जाति क्या मूल रूप से हिन्दू है? क्या ये महाराजा विक्रमादित्य के कृत-सैनिक हैं? फारसी का कुर्द शब्द क्या संस्कृत के कृत शब्द का अपभ्रंस है?
Wednesday, 20 May 2026
ब्रह्मज्ञान का अभाव इस संसार में हमारी दुर्गति का मुख्य कारण है --- .
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Tuesday, 19 May 2026
एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।
एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।
Saturday, 16 May 2026
मैं तो फूल हूँ, मुरझा गया तो मलाल कैसा? तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....
तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....
अपने दिन का आरंभ भगवान के ध्यान से कीजिए ---
अपने दिन का आरंभ भगवान के ध्यान से कीजिए। वैसे तो पूरी गीता ही योग शास्त्र है, लेकिन उसके १५ वें अध्याय "पुरुषोत्तम योग" के आरंभिक ६ श्लोकों में योग-साधना के सारे सूत्र समाहित हैं। लेकिन वे भगवान की कृपा से ही समझ में आ सकते हैं। उन्हें बौद्धिक रूप से समझने मात्र का ही नहीं, निज जीवन में अवतरित कीजिए।
श्रीविद्या, अद्वैत-वेदान्त, और पुरुषोत्तम-योग ---
श्रीविद्या, अद्वैत-वेदान्त, और पुरुषोत्तम-योग ---
Wednesday, 13 May 2026
सीता नवमी की शुभ कामनाएँ ---
सीता नवमी की शुभ कामनाएँ ---
Monday, 11 May 2026
जिसने मुझे मेरे होने का बोध कराया, वे ही मेरे परमात्मा हैं, और वे ही यह "मैं" हूँ ---
जिसने मुझे मेरे होने का बोध कराया, वे ही मेरे परमात्मा हैं, और वे ही यह "मैं" हूँ। मैं यह देह नहीं, मेरे प्रियतम, सर्वव्यापी मेरे प्रभु के साथ एक हूँ।
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सनातन-धर्म ही भारत राष्ट्र का सत्व, मर्म, मूलाधार और प्राण है।
सनातन-धर्म ही भारत राष्ट्र का सत्व, मर्म, मूलाधार और प्राण है। सनातन-धर्म के बिना भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। सनातन-धर्म ही इस सम्पूर्ण सृष्टि का भविष्य है। सनातन-धर्म की निश्चित रूप से पुनर्प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
Sunday, 10 May 2026
हम अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं ?
हम अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ क्या कर सकते हैं ?
भगवान एक छोटे और भोले-भाले बालक की तरह ही लगते हैं। पता नहीं वे इतनी बड़ी सृष्टि कैसे चला लेते हैं ?
भगवान एक छोटे और भोले-भाले बालक की तरह ही लगते हैं| पता नहीं, वे इतनी बड़ी सृष्टि कैसे चला लेते हैं? उनको डांट भी दो तो वे बुरा नहीं मानते, और लौट कर फिर बापस हँसते हुए आ जाते हैं| उन पर तरस भी आता है और उन से पूरा प्रेम भी बना रहता है| भाव जगत में वे हर बात का उत्तर भी देते हैं| कम से कम मुझे तो उनसे पूरी संतुष्टि है| एक बड़े काम की रहस्यमय बात भी उन्होने आज बताई है| उनके सर्वव्यापी ब्रह्मरूप से तो मुझे भाव जगत में उनका बालरूप ही अधिक अच्छा लगता है| भगवान उसी रूप में अच्छे लगते हैं जिनसे मित्रतावश लड़ाई-झगड़ा भी कर सकें, और जिन के साथ खेल भी सकें| उनके साथ एकत्व नहीं, उनका मित्र रूप चाहिए| ब्रह्मभाव में तो कभी भी स्थित हो सकते हैं पर उन का मित्रभाव बड़ा दुर्लभ है| आगे अब जैसी उनकी इच्छा॥ ११ मई २०२१
भगवती छिन्नमस्ता ---
भगवती छिन्नमस्ता ---