Tuesday, 19 May 2026

एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।

 एक-दो बातें हैं जो मुझे विचलित कर देती हैं।

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पहली बात तो भाषा की है। मैं सरल से सरल हिन्दी भाषा में लिखता हूँ, इस से अधिक सरल भाषा नहीं हो सकती, फिर भी अनेक लोग मुझसे शिकायत करते हैं कि मेरी भाषा उन्हें समझ में नहीं आती। यदि समझ में नहीं आती तो भाषा का अध्ययन करो, अपना शब्द-कोष बढ़ाओ।
सड़क छाप भाषा का प्रयोग कर मैं अपना स्तर नीचा नहीं कर सकता। जो मेरी हिन्दी भाषा को नहीं समझते, उन्हें हिन्दी भाषा का ज्ञान ही नहीं है। वे मुझे नहीं पढ़ें।
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मैं जिन विषयों पर लिखता हूँ, यदि वे किसी को अच्छे नहीं लगते तो वे मुझे प्रतिबंधित (Restrict) या अवरुद्ध (Block) कर दें। मैं अपने स्वभाव के अनुकूल और आत्म-संतुष्टि के लिए लिखता हूँ, किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं।
आध्यात्म में भक्ति और वेदान्त की बातें मुझे बहुत प्रिय हैं इसलिए मैं गीता और उपनिषदों की बातें सरल से सरल भाषा में लिखता रहता हूँ। अपना स्तर इससे अधिक नीचे नहीं गिरा सकता।
विश्व के अनेक देशों की मैंने खूब यात्राएं की हैं, और विदेशों में खूब रहा हूँ। पहले उनके बारे में खूब लिखता था; अब उनके बारे में लिखना पूरी तरह बंद कर दिया है। अब लिखूँगा तो केवल आध्यात्म पर ही लिखूँगा, अन्यथा कुछ भी नहीं लिखूँगा। सभी को नमन !!
कृपा शंकर
19 मई 2024

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