Saturday, 16 May 2026

मैं तो फूल हूँ, मुरझा गया तो मलाल कैसा? तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....

मैं तो फूल हूँ, मुरझा गया तो मलाल कैसा?
तुम तो महक हो, तुम्हें अभी हवाओं में समाना है .....
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किसी को किसी के प्रति भी द्वेष नहीं रखना चाहिए| राग और द्वेष ये दो ही पुनर्जन्म यानि इस संसार में बारम्बार आने के कारण हैं| जिससे भी हम द्वेष रखते हैं, अगले जन्म में उसी के घर जन्म लेना पड़ता है| जिस भी परिस्थिति और वातावरण से हमें द्वेष हैं वह वातावरण और परिस्थिति हमें दुबारा मिलती है| बुराई का प्रतिकार करो, युद्धभूमि में शत्रु का भी संहार करो पर ह्रदय में घृणा बिलकुल भी ना हो| परमात्मा को कर्ता बनाकर सब कार्य करो| कर्तव्य निभाते हुए भी अकर्ता बने रहो| सारे कार्य परमात्मा को समर्पित कर दो, फल की अपेक्षा या कामना मत करो|
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ॐ तत्सत् ! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१७ मई २०१९

1 comment:

  1. वो नही मिला तो मलाल क्या जो गुज़र गया सो गुज़र गया. (लेखक :बशीर बद्र)
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    वो नही मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    उसे याद करके ना दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    ना गिला किया ना ख़फ़ा हुए, युँ ही रास्ते में जुदा हुए
    ना तू बेवफ़ा ना मैं बेवफ़ा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    तुझे एतबार-ओ-यकीं नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं
    ना मलाल कर, मेरे साथ आ, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    वो वफ़ाएँ थीं, के जफ़ाएँ थीं, ये ना सोच किस की ख़ताएँ थीं
    वो तेरा हैं, उसको गले लगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    वो ग़ज़ल की कोई किताब था , वो गुलों में एक गुलाब था
    ज़रा देर का कोई ख़्वाब था, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    मुझे पतझड़ों की कहानियाँ, न सुना सुना के उदास कर
    तू खिज़ाँ का फूल है, मुस्कुरा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    वो उदास धूप समेट कर कहीं वादियों में उतर चुका
    उसे अब न दे मिरे दिल सदा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    ये सफ़र भी किताना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
    कहाँ लौट कर कोई आएगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    कोई फ़र्क शाह-ओ-गदा नहीं, कि यहाँ किसी को बक़ा नहीं
    ये उजाड़ महलों की सुन सदा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया
    (लेखक: बशीर बद्र)
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    "मुझे पतझड़ों की कहानियाँ, न सुना सुना के उदास कर.
    तू खिज़ाँ का फूल है, मुस्कुरा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया."
    ......... इन शब्दों में मैनें अपनी भावनाएँ ही व्यक्त की है

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