Thursday, 26 February 2026

ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या ........

 ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या ........

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'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मेव नापरः' ........ भगवत्पाद जगद्गुरू शंकराचार्य का यह कथन उनका अपना अनुभव है| उन्होंने समाधी की उच्चतम अवस्था में इस सत्य को अनुभूत किया| जिसने इसे अनुभूत किया उसके लिए तो यह सत्य है, और जो सिर्फ बुद्धि से या पूर्वाग्रह से कह रहा है उसके लिए असत्य है|
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आज के भौतिक विज्ञानी कह रहे हैं कि पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं है, यह घनीभुत उर्जा ही है जो अपनी आवृतियों द्वारा पदार्थ के रूप में व्यक्त हो रही है| किस अणु में कितने इलेक्ट्रोन हैं वे तय करते हैं कि पदार्थ का बाह्य रूप क्या हो| अंततः ऊर्जा भी एक विचार मात्र है ---- सृष्टिकर्ता के मन का एक विचार या संकल्प|
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यह बात वैज्ञानिक दृष्टी से तो सत्य है पर जो इसे नहीं समझता उसके लिए असत्य| आज के वैज्ञानिक तो सत्य अपनी प्रयोगशालाओं में सिद्ध कर रहे हैं उसी सत्य को भारतीय ऋषियों ने समाधी की अवस्था में समझा| इस सत्य को आचार्य शंकर ने चेतना के जिस स्तर को उपलब्ध होकर कहा उसे हम चेतना के उस स्तर पर जाकर ही समझ सकते हैं| बुद्धि द्वारा किसी निर्णय पर नहीं पहुँच सकते| धन्यवाद|
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ॐ नमः शिवाय| ॐ ॐ ॐ ||
26 फरवरी 2016

वीर विनायक दामोदर सावरकर के पुण्य दिवस पर समस्त भारत राष्ट्र को नमन व सभी भारतीयों का अभिनन्दन

 "यदि देश हित मरना पड़े मुझको सहस्त्रों बार भी, तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं कभी|

हे ईश, भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो, कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो||
= विस्मिल=
वीर विनायक दामोदर सावरकर के पुण्य दिवस पर समस्त भारत राष्ट्र को नमन व सभी भारतीयों का अभिनन्दन|
भारत की स्वतन्त्रता में वीर सावरकर का योगदान किसी भी अन्य नेता से कम नहीं था| ये निश्चित रूप से कोई महान ऋषि थे जिन्होंने भारत माता को स्वतंत्र कराने के लिए जन्म लिया| भारत माँ के कष्ट इन्होने स्वयं पर लिए और भारत को स्वतंत्र करवाया| ब्रिटिश प्रधानमन्त्री ने भारत की स्वतंत्रता में गाँधी के योगदान को शून्य बताया था| ब्रिटिश पार्लियामेंट में वहां के प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत को हम इसलिए स्वतंत्र कर रहे हैं कि द्वीतिय विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजी फौज में इतना दम नहीं है कि भारत पर नियंत्रण कर सके और वहां की भाड़े की हिन्दुस्तानी फौज अँगरेज़ अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं कर रही है| द्वीतिय विश्व युद्ध से पहले भारत की सेना में हिन्दुओं की संख्या मात्र 35% थी, बाकि 65%मुस्लमान थे| वीर सावरकर ने पूरे भारत में घूमकर हज़ारों हिन्दू युवकों को फौज में भरती करवाया| इससे संख्या का अनुपात बदल गया और हिन्दू सिपाही 65% से ऊपर पहुँच गए| उनकी योजना थी कि चूंकि हिन्दुओं के पास कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं है और न उनको अस्त्र चलाने आते हैं अतः अधिक से अधिक हिन्दु युवक सेना में भर्ती हों, अस्त्र चलाना सीखें और उन अस्त्रों का मुंह अंग्रेजों की ओर मोड़ दें| नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को उन्होंने ही भारत से बाहर जाकर आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना की प्रेरणा दी| नेताजी भारत छोड़ने से पहले सावरकर जी से मिल कर गए थे| जापान में श्री रास बिहारी बोस ने सारी भूमिका तैयार कर रखी थी| द्वीतिय विश्व युद्ध में अंग्रेजों की फौज की कमर सी टूट चुकी थी| आज़ाद हिन्द फौज से और क्रांतिकारियों से अँगरेज़ बहुत डरे हुए थे| भारत में सिपाहियों ने अँगरेज़ अधिकारियों के आदेश मानना बंद कर दिया था| नौसेना ने विद्रोह कर दिया और अँगरेज़ अधिकारियों को कोलाबा में बंद कर उनके चारों ओर बारूद लगा दी| ये सब परिस्थितियाँ थीं जिनसे भारत स्वतंत्र हुआ| विद्रोही सैनिकों व क्रांतिकारियों को प्रेरणा मिली वीर सावरकर की पुस्तक 1857 का स्वातंत्र्य समर से| 1857 के स्वातंत्र्य संग्राम का यह सही नाम उन्होंने ही दिया अन्यथा इसे सिपाही विद्रोह कहा जाता था| जब कभी भविष्य में भारत का सही इतिहास लिखा जाएगा तो इन्हें राष्ट्र पुरुष के रूप में याद किया जाएगा| ये भारत के हिन्दुओं का सैन्यीकरण करना चाहते थे, उसी तरह जैसे गुरु गोबिन्दसिह जी ने किया था, पर परिस्थितियाँ ऐसी बनी कि कर नहीं पाए| वीर सावरकर अमर रहें| भारत माता की जय|
कृपा शंकर
२६ फरवरी २०१३