आज श्रावण शुक्ल तृतीया है| महिलाओं के लिए यह अति पावन पर्व है|
कल #सिंजारा था| विवाहिता और अविवाहिता महिलाओं व कन्याओं ने कल हाथों में मेंहदी रचाई और रूप निखारा| उनके लिए पक्वान्न बनाये गए, उन्हें मिठाइयां और उपहार दिए गए|
आज सायंकाल #तीज की सवारी निकलेगी| महिलाएँ तीज के रूप में गौरी (पार्वती) की पूजा करेंगी|
अनेक जन्मों की तपस्या के उपरांत शिव को पति के रूप में पाकर पार्वती ने आज पतिगृह में प्रवेश किया था| जटाजूटधारी भस्म रचाए शिव को जिनका कोई रहने का ठिकाना नहीं, बैल की सवारी, भूत-प्रेत व विचित्र आकृति वाले गणों का साथ, पाकर भी पार्वती ने कभी कोई शिकायत नहीं की| उनका दाम्पत्य जीवन आदर्श था| तभी उनके गणेश व कार्तिकेय जैसे दिव्य बालक हुए|
उपरोक्त कथा चाहे प्रतीकात्मक हो पर हज़ारों वर्षों से समाज को प्रेरणा देती आई है|
यह महिलाओं के लिए सुयोग्य पति की प्राप्ति और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए पार्वती पूजन का दिवस है| हमाँरी शुभ कामना और प्रार्थना है कि सभी महिलाओं का दाम्पत्य जीवन सुखी हो|
इस समय जब प्रकृति चारों तरफ हरियाली की चादर सी बिछा देती है तो प्रकृति की इस छटा को देखकर मन पुलकित होकर नाच उठता है। जगह-जगह झूले पड़ते हैं। स्त्रियों के समूह गीत गा-गाकर झूला झूलते हैं। पुनश्चः समस्त मातृशक्ति का अभिनन्दन व शुभ कामनाएँ|
९ अगस्त २०१३
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