अपनी संतान को दुःखी देखकर हर पिता दुःखी हो जाता है| हमारे दुःख और पीड़ाओं से भगवान भी बहुत खिन्न हैं| वे चाहते हैं कि उनकी संतान लौट कर बापस उनके पास आए, पर उनके पास कोई आना ही नहीं चाहता| सभी उनकी महाठगिनी माया से ही प्रसन्न हैं| भगवान भी कुछ नहीं कर सकते| अपने बनाए नियमों को वे नहीं तोड़ते, अन्यथा सृष्टि नहीं चलेगी| माया-मोह में दुःख ही दुःख हैं|
"ॐ खं ब्रह्म" || 'ख' आकाश-तत्व को कहते हैं| आकाश-तत्व परमात्मा का द्योतक है| योगी, आकाश-तत्व का ध्यान करते हैं, और आकाश-तत्व में विचरण करते हैं| जो 'ख' के समीप है वह सुखी है, और जो 'ख' से दूर है, वह दुःखी है|
हिरण्येन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम |
योसावादित्ये पुरुषः सोसावहम| ॐ खं ब्रह्म ||
७ जुलाई २०२०
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