वैज्ञानिक दृष्टिकोण से और भारत की गौरवपूर्ण परम वैभवशाली परम्परानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ही नववर्ष का प्रारम्भ है|
इसका प्रारंभ जगन्माता की आराधना से होता है| भगवान श्री राम की आराधना भी इस समय होती है|
आज के ही दिन इस सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी ने की, भगवन श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ, बहुत सारी अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुईं और २०७० वर्ष पूर्व महाराजा विक्रमादित्य ने हूण और शक आक्रमणकारियों को पराजित कर उन्हें सनातन धर्म में आत्मसात किया|
महाराज विक्रमादित्य का राज्य वर्तमान ईरान, अरब और तुर्की तक था| ईरान में उनकी एक मूर्ती मिली थी जिस में वे धोती पहिने भारतीय वेश-भूषा में एक घोड़े पर सवार हैं| कुछ इतिहासकार कहते हैं कि उनका निधन भी ईरान में हुआ| इराक और तुर्की की कुर्द जाति उनके भारतीय कृत सैनिकों की ही वंशज है| उनका समय भारत का गौरवशाली युग था|
मैं अपने पूर्ण ह्रदय से अपने सभी मित्रों और पाठकों को नववर्ष की शुभ कामनाएँ और मेरा नमस्कार प्रेषित करता हूँ| अपने स्नेह और आशीर्वाद की कृपा मुझ जैसे अकिंचन स्नेहाभिलाषी पर करते रहें|
कृपा शंकर
११ अप्रैल २०१३
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