Saturday, 21 February 2026

संसार में बुराई की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भलाई की ---

 संसार में बुराई की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी भलाई की --

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यदि संसार में सारे प्राणी सज्जन हो जाएँ, या सभी दुर्जन हो जाएँ, तो यह सृष्टि तत्क्षण नष्ट हो जायेगी| संसार में बुराई है इसीलिए अच्छाई भी है| संसार में दुर्जन हैं इसीलिए सज्जन भी हैं जो अच्छे कार्य करते हैं, अन्यथा कोई भी नहीं करेगा|
जो विवेकी हैं वे स्थिर बुद्धि के होते हैं, एक बार जो कार्य आरम्भ करते हैं उसे पूरा कर के ही छोड़ते हैं| जो हमारा उपकार करते हैं, उनके प्रति हमें कृतज्ञ रहना चाहिए| कृतघ्नता बहुत बड़ा पाप है| हमारा व्यवहार सदा मधुर हो यह हमारे चरित्र की शोभा है| सत्य भी कहें तो ऐसे कहें जो दूसरों को प्रिय लगे| किसी के पीछे से उसके बारे में कोई बात नहीं करनी चाहिए| इससे दुर्भावना और शत्रुता फैलती है|
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सबसे बड़ा गुण है ... हमारे हृदय में परमात्मा की चेतना निरंतर बनी रहे| हृदय में परमात्मा होंगे तो सभी कार्य अच्छे ही होंगे|
हरिः ॐ तत् ॐ सत्॥ ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर
२१ फरवरी २०१७

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