हम भगवान का ध्यान या भजन करते हैं; यह हमारा भ्रम है, जो जितनी शीघ्र टूट जाये उतना अच्छा ! भगवान ही हमारा ध्यान रखते हैं, वे ही हमारे प्राण व सर्वस्व हैं। भगवान ही हमारे माध्यम से स्वयं की साधना करते हैं। वे हमारे साथ एक हैं। वे ही अपना ध्यान कर रहे हैं --
"हं सः" मैं वह हूँ। यह समस्त ब्रह्मांड, यह सारी सृष्टि मैं हूँ।
.
हमारे अस्तित्व के पीछे परमात्मा का प्रकाश है। उस प्रकाश पर आस्था, श्रद्धा और विश्वाश रखिये। जो भी होगा वह अच्छा ही होगा। परमात्मा को हर समय अपनी स्मृति में रखें। रात्री को सोने से पूर्व, और प्रातःकाल उठते ही कुछ देर उन का भजन करें। सभी श्रद्धालुओं की रक्षा होगी। परमात्मा का इतना चिंतन करें कि वे ही हमारी सारी चिंताएँ करें। वे हर समय हर स्थान पर हमारे साथ हैं। हमारा प्रथम, अंतिम और एकमात्र लक्ष्य परमात्मा को उपलब्ध होना है। परमात्मा ही परम सत्य है। परमात्मा में हम सब एक हैं। परमात्मा ही हमारे अस्तित्व हैं।
प्रियतम परमात्मा से पृथक कोई भी या कुछ भी अन्य नहीं है। जहाँ हम हैं, वहीं हमारे प्रियतम हैं। कोई भेद नहीं है। ॐ तत् सत् !!
कृपा शंकर
२५ अप्रेल २०२६
No comments:
Post a Comment