(प्रश्न १) : शिव और शक्ति में क्या भेद है?
(प्रश्न २) : हनुमान जी की अनुभूति शिव-रूप में भी होती है, और शक्ति के रूप में भी। अतः वे शिव हैं या शक्ति ?
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शिव और शक्ति दोनों एक ही सर्वोच्च सत्ता के दो पूरक स्वरूप हैं। मैं इनमें कोई भेद नहीं कर पाता, इसीलिए यह प्रश्न कर रहा हूँ।
परमात्मा का पितृ रूप शिव है, तो मातृ रूप शक्ति है। मुझे लगता है कि शिव — विशुद्ध विवेक हैं, तो शक्ति — विशुद्ध प्रेम। जिन्होंने इस सम्पूर्ण सृष्टि को धारण कर रखा है वे शक्ति हैं, और जो स्वयं यह सारी सृष्टि बन गये हैं, वे शिव हैं।
शिव बिना शक्ति के शव समान हैं। शिव असीम और अनंत हैं, लेकिन शक्ति के बिना वे असहाय होकर कोई भी कार्य नहीं कर सकते। जैसे अग्नि और उसके ताप को अलग अलग नहीं कर सकते, वैसे ही शिव और उन की शक्ति को पृथक पृथक नहीं किया जा सकता।
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मेरा अगला प्रश्न है कि श्रीहनुमान जी शिव है या शक्ति। मेरी अनुभूति है कि श्रीहनुमान जी शिव भी हैं और शक्ति भी हैं। अतः वे किस श्रेणी में आते हैं यह मैं नहीं कह सकता। वे दोनों ही हैं। मैं अपनी अनुभूतियों को गोपनीय रखना चाहता हूँ। वे बड़ी दिव्य हैं। इसलिए इतना ही कह सकता हूँ कि श्रीहनुमान जी शिव भी हैं, और शक्ति भी हैं। मेरे लिए तो वे इस विमान के चालक भी हैं, और यह विमान भी वे ही हैं। (He is the pilot of this aircraft, and the aircraft too.)
ॐ तत् सत् !!
कृपा शंकर
२३ मई २०२६
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