जिनकी आस्था -- ईश्वर के अवतारों, आत्मा की शाश्वतता, कर्मफल, पुनर्जन्म व अहिंसा में है, मैं उन्हे ही हिन्दू कहता हूँ। हिन्दू शब्द का अर्थ है -- जो हिंसा से दूर है (यहाँ हिंसा का अर्थ लोभ व अहंकार से है जो हिंसा के एकमात्र कारण हैं)।
दूसरे दृष्टिकोण से जिनकी सोच ऊर्ध्वमुखी है, व जो ईश्वर का निरंतर चिंतन करते हैं, वे हिन्दू हैं चाहे वे पृथ्वी के किसी भी भाग पर रहते हैं। ऐसे लोगों का समूह ही हिन्दू राष्ट्र है। ईश्वर का अनुस्मरण करते हुए हम अपने शत्रुओं का बध तो अवश्य करें, लेकिन हमारे मन में किसी भी तरह का क्रोध या घृणा न हो।
यह मेरा दृष्टिकोण है, जो आवश्यक नहीं कि पूर्णतः सही हो। इस विषय पर विद्वान मनीषियों के विचार आमंत्रित हैं। ॐ तत् सत् !!
कृपा शंकर
९ अप्रेल २०२६
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