Saturday, 27 June 2026

हमारी आध्यात्मिक साधना में विघ्न आने का एकमात्र कारण हमारा लोभ और अहंकार ही है, जो कर्ताभाव के कारण होता है। हमारा लोभ और अहंकार ही हमें पतन के मार्ग पर धकेलता है। अन्य कोई कारण नहीं है।

 हमारी आध्यात्मिक साधना में विघ्न आने का एकमात्र कारण हमारा लोभ और अहंकार ही है, जो कर्ताभाव के कारण होता है। हमारा लोभ और अहंकार ही हमें पतन के मार्ग पर धकेलता है। अन्य कोई कारण नहीं है।

आध्यात्मिक साधना वो ही सफल होती है जो परमात्मा को कर्ता बनाकर समष्टि के कल्याण के लिए की जाती है। जहां समष्टि के कल्याण की भावना होती है, और कर्ताभाव नहीं रहता (यानि परमात्मा ही एकमात्र कर्ता होते हैं) वहीं सफलता निश्चित रूप से मिलती है। परमात्मा के प्रति हमारा समर्पण पूर्ण होगा तभी हम सफल होंगे। परमात्मा को पूर्ण समर्पण और निज जीवन में उनकी अभिव्यक्ति -- सनातन धर्म है। हमारा हर कार्य परमात्मा की प्रसन्नता के लिए हो। ॐ तत् सत् !! महादेव महादेव महादेव !!
कृपा शंकर
१० मई २०२६

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