भारत इस सृष्टि का भविष्य, और एक सनातन चिन्मय सत्ता है, जो अमर है और सदा अमर रहेगी। यहाँ ईश्वर स्वयं अवतृत होते हैं। भारत की अस्मिता और भविष्य "सत्य-सनातन-धर्म" है। हम परमात्मा के प्रकाश को फैलाते रहेंगे तो हमारी विजय सुनिश्चित है। कोई माने या न माने पर जीवन के अंतिम काल में सभी को यह मानना ही पड़ता है कि उन्हें अपने जीवन की युवावस्था में ही भगवान से जुड़ जाना चाहिए था व भगवत्-साक्षात्कार ही उन के जीवन का एकमात्र लक्ष्य और उद्देश्य होना चाहिए था। संसार से राग-द्वेष और अहंकार ही सारी समस्याओं की जड़ होते हैं। जब तक यह बात समझ में आती है, तब तक बहुत अधिक देरी हो जाती है। इसी उधेड़बुन में प्राण छूट जाते हैं।
कृपा शंकर
१२ मई २०२६
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