Friday, 26 June 2026

मैं फेसबुक और सोशल मीडिया पर क्यों आया, और क्यों हूँ?

 मैं फेसबुक और सोशल मीडिया पर क्यों आया, और क्यों हूँ?

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स्वयं को, यानी स्वयं के विचारों व भावनाओं को व्यक्त करने की एक अभिलाषा थी; जिसने मुझे फ़ेसबुक व अन्य सोशल मीडिया की ओर आकर्षित किया। इससे मुझे अनेक मित्र व शुभचिंतक मिले जो अन्यथा कहीं पर भी नहीं मिल सकते थे। अब मैं पूर्णतः तृप्त और संतुष्ट हूँ। किसी से कुछ भी नहीं चाहिए। मैं सभी को उनकी मंगलमय शुभ कामनाओं के लिए साभार धन्यवाद देता हूँ।
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मेरा चिंतन और मेरे विचार आध्यात्मिक हैं। आध्यात्मिक विचारों के लोगों का मिलना बड़ा दुर्लभ होता है। सर्वव्यापी व सर्वस्व भगवान स्वयं ही मेरे गुरु हैं, जिनके आदेश का पालन करने की अब चेष्टा कर रहा हूँ। उनका आदेश है कि मैं दिन में यदि एक घंटे स्वाध्याय करूँ तो उससे आठ गुणा अधिक यानि कम से कम आठ घंटे परमब्रह्म परमात्मा का ध्यान करूँ। परमब्रह्म स्वयं ही यह सृष्टि बन गए हैं, और हमारा उच्चतम कर्तव्य उनका साक्षात्कार करना है। यही मेरा स्वधर्म है। इस जीवन का अधिक समय नहीं बचा है। जो भी समय बचा है, वह परमात्मा को पूर्णतः समर्पित है।
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सूक्ष्म जगत की अनेक अवर्णनीय दुर्लभ अनुभूतियाँ मुझे गुरुकृपा से हुई हैं। उन्होंने क्या कहा? अब इसका कोई महत्व नहीं है। वे क्या हैं? महत्व केवल इसी का है। ऊर्ध्व कूटस्थ सूर्यमण्डल में परमब्रह्म परमात्मा का ध्यान करते करते ब्रह्मरंध्र के मार्ग से एक दिन स्वतः ही इस शरीर महाराज का साथ छूट जाएगा। वह वास्तविक स्वतंत्रता होगी जिसमें मैं सभी के साथ एक होऊंगा। घनीभूत प्राण-तत्व के रूप में जगन्माता जब तक इस देह में विचरण कर रही हैं, तब तक यह देह जीवंत है। जगन्माता मुझे एक और अवसर दे रही हैं, परमशिव पुरुषोत्तम से साक्षात्कार करने का। क्या आभार व्यक्त करूँ जगन्माता का ? उनकी कृपा असीम है।
ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
१ जून २०२६

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