आजकल ब्राह्मणों के विरुद्ध बहुत अधिक भेदभाव, अन्याय और दुष्प्रचार हो रहा है। दुर्भाग्य से यह सत्य है। ईसाई मज़हब के प्रचारकों ने सनातन हिन्दू धर्म को नष्ट करने के लिए सर्वप्रथम ब्राह्मणों की संस्था को समाप्त करने की पूरी चेष्टा की, और अभी भी कर रहे हैं। उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थों को प्रक्षिप्त किया, ब्राह्मणों के विरुद्ध बहुत अधिक दुष्प्रचार किया, और बहुत बड़ी संख्या में ब्राह्मणों की हत्याएँ की। उनके द्वारा लिखे गए झूठे इतिहास को अब भी पढ़ाया जाता है। इतना अधिक असत्य फैलाया गया है, और अभी भी फैलाया जा रहा है, जिसका दुष्परिणाम ब्राह्मणों के विरुद्ध हो रहा अत्याचार है।
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ब्राह्मणों को अपने धर्म पर दृढ़ रहते हुए अपना आत्म-सम्मान बनाए रखना चाहिए। ब्राह्मण होने की सार्थकता ब्रह्मज्ञ होने में है। हर ब्राह्मण ब्रह्मविद् हो। परमब्रह्म परमात्मा की उपासना हरेक ब्राह्मण का धर्म है। वे पृथ्वी पर चलते-फिरते देवता हैं। पृथ्वी उन्हें पाकर सनाथ हो जाती है। वे याचक बनकर न रहें। अपने देवत्व को याद रखें और अपने धर्म पर अडिग रहें।
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जहाँ कोई उनका अपमान करे, वहाँ न जाएँ। किसी को ब्राह्मण से देवकार्य न कराना हो तो वे किसी पादरी या मौलवी से करवा लेंगे। सबका सम्मान करते हुए आत्मसम्मान और पूर्ण सत्यनिष्ठा से ब्राह्मण अपना जीवनयापन करें।
"नमो ब्रह्मण्य देवाय गो-ब्राह्मण हिताय च।
जगत् हिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः॥"
कृपा शंकर / ३० मई २०२६
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