Friday, 26 June 2026

यह सारा ब्रह्मांड / सारी सृष्टि -- हमारी देह है ---

 यह सारा ब्रह्मांड / सारी सृष्टि -- हमारी देह है ---

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पूर्ण रूपेण शांत होकर निज चेतना में इस देह के उच्चतम परम ज्योतिर्मय बिन्दु पर भगवान विष्णु, या उनके किसी अवतार, या भगवान शिव के, अनंत सर्वव्यापी रूप का ध्यान कीजिये। सारी सृष्टि उनमें है, और वे सारी सृष्टि में हैं। अपना स्वयं का विलय भी उन्हीं में कर दीजिए। जहां तक कर्ताभाव का प्रश्न है, कर्ता भी उन्हीं को या हनुमान जी को बनाइए। यह बात संभवतः आपको विचित्र लगे, लेकिन यह सत्य है कि हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो शिव भी हैं और शक्ति भी हैं। उनकी उपासना दोनों के रूप में की जा सकती है। वे सर्वशक्तिशाली और तमाम क्षुद्रताओं से परे हैं। कुंडलिनी महाशक्ति की अनुभूति भी सभी साधकों को होती है, और कुंडलिनी महाशक्ति के रूप में हनुमान जी की अनुभूति भी सभी साधकों को कभी कभी हो जाती है।
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शिव पूजा और श्रीमद्भगवद्गीता का नित्य स्वाध्याय कीजिए। इससे आपके हरेक संशय का निवारण होगा। अजपा-जप या श्रीमद्भगवद्गीता में बताई गई किसी विधि से जप व ध्यान कीजिए। श्रीरामचरितमानस और भागवत पुराण का स्वाध्याय भी बहुत अधिक लाभदायी होगा। आप वीतराग, स्थितप्रज्ञ, और निःस्त्रेगुण्य बनें। आप कूटस्थ-चैतन्य में स्थित हों।
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पहले मैं परमात्मा के परम शिव रूप के ध्यान का साक्षी था, आजकल भगवान अपने पुरुषोत्तम रूप का ध्यान मुझे निमित्त बनाकर स्वयं कर रहे हैं।
नारायण !! आपका आशीर्वाद बना रहे, और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए।
मंगलमय शुभकामना के साथ आपको ॐ नमो नारायण !!
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"। ॐ तत् सत् !! ॐ स्वस्ति !!
कृपा शंकर
६ जून २०२६

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