Friday, 26 June 2026

"पुरुषोत्तम" शब्द का अर्थ जो मुझे समझ में आया है --

 "पुरुषोत्तम" शब्द का अर्थ जो मुझे समझ में आया है --

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यहाँ मैं सही या गलत की बात नहीं कर रहा। बात मैं उस तथ्य की कर रहा हूँ, जो मुझे समझ में आया है। मेरी समझ सही भी हो सकती है और गलत भी। इसका निर्णय परमात्मा के हाथ में है। मुझे पुरुषोत्तम शब्द के तीन अर्थ समझ में आए हैं, जो निम्न हैं ---
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(१) पुरुष शब्द का प्रयोग वेदों में भगवान नारायण यानि विष्णु के लिए किया गया है। जहां पुरुष और प्रकृति -- दोनों एक साथ हैं, दोनों में कोई भेद नहीं है, वह भगवान का पुरुषोत्तम रूप है। उपासना हमें पुरुषोत्तम की ही करनी चाहिए। भगवान विष्णु ही यह सम्पूर्ण विश्व यानि सृष्टि हैं। जिसने इस सम्पूर्ण सृष्टि को धारण कर रखा है, वह प्रकृति है। जहां दोनों एक साथ होते हैं, वहाँ वे पुरुषोत्तम हैं।
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(२) भगवान श्रीकृष्ण का ही एक नाम गोविंद है। गोविंद का शाब्दिक अर्थ है जो हमारे भीतर के अंधकार यानि तमस को नष्ट करे। श्रीराधा उस शक्ति का नाम है जिसने इस समस्त सृष्टि को धारण कर रखा है। जहां भगवती श्रीराधा और भगवान गोविंद -- दोनों एक हैं, वह भगवान का पुरुषोत्तम रूप है।
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(३) जहां शिव और शक्ति दोनों एक हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार तत्व रूप में शिव और विष्णु में कोई भेद नहीं है, दोनों एक हैं। जो परमशिव हैं, वे ही पुरुषोत्तम हैं, क्योंकि दोनों की अनुभूतियाँ एक सी हैं। कुंडलिनी महाशक्ति जब परमशिव से मिलकर एक हो जाती है, तब जो रूप व्यक्त होता है, वह "पुरुषोत्तम" है।
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अब सब तरह के विवादों को त्याग कर हमें परमात्मा के पुरुषोत्तम रूप की उपासना करनी चाहिए। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ ॐ नमः शिवाय।
कृपा शंकर / ८ जून २०२६
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पुनश्च: -- पुरुषोत्तम क्षेत्र
जगन्नाथ पुरी को ही पुरुषोत्तम क्षेत्र कहते हैं। यह एक मोक्षदायिनी तीर्थ है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) को समर्पित है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार यहाँ भगवान जगन्नाथ स्वयं निवास करते हैं।

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