Friday, 26 June 2026

ब्राह्मण एक विशेष रचना है भगवान की ---

 ब्राह्मण एक विशेष रचना है भगवान की ---

.
भगवान ने "ऊँ", "तत्", और "सत्" ये अपने तीन नाम बताए हैं। और यह भी बताया है कि इनसे उन्होंने "ब्राह्मण", "वेद", और "यज्ञ" की रचना की है। सृष्टि के त्वरित विकास के लिए भगवान ने ब्राह्मण की एक विशेष रचना की है।
.
मैं जो लिख रहा हूँ, यह भगवान का आश्वासन है। ब्राह्मण अपना धर्म न छोड़ें। ब्राह्मण का सर्वोपरी धर्म है —"ब्रह्म का अनुसंधान"। आप ब्रह्मज्ञ होंगे तो देवता भी आपके समक्ष झुकेंगे। गीता में भगवान कहते हैं --
"ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः।
ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा॥१७:२३॥"
अर्थात् -- 'ऊँ, तत् सत्' ऐसा यह ब्रह्म का त्रिविध निर्देश (नाम) कहा गया है; उसी से आदिकाल में (पुरा) ब्राहम्ण, वेद और यज्ञ निर्मित हुए हैं॥
.
भगवान ने ब्राह्मण के ये स्वभाविक कर्म बतलाए हैं ---
"शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्॥१८:४२॥"
अर्थात् -- शम, दम, तप, शौच, क्षान्ति, आर्जव, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिक्य - ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म हैं॥
Serenity, self-restraint, austerity, purity, forgiveness, as well as uprightness, knowledge, wisdom and faith in God -- these constitute the duty of a spiritual Teacher.
मन का निग्रह करना, इन्द्रियों को वशमें करना; धर्मपालनके लिये कष्ट सहना; बाहर-भीतर से शुद्ध रहना; दूसरों के अपराध को क्षमा करना; शरीर, मन आदि में सरलता रखना; वेद, शास्त्र आदिका ज्ञान होना; यज्ञविधि को अनुभव में लाना; और परमात्मा, वेद आदि में आस्तिक भाव रखना -- ये सब-के-सब ब्राह्मण के स्वभाविक कर्म हैं।
.
इस विषय पर एक विस्तृत लेख पहिले भी लिखा था। अब उसकी आवश्यकता नहीं है। हमारे शास्त्रों के अनुसार ब्राह्मण का उच्चतम कर्तव्य -- "ब्रह्म का अनुसंधान" यानि "संध्या, गायत्री, प्राणायाम व सविता देव की भर्गः ज्योति का गहनतम ध्यान" है। इस विषय पर मैंने खूब स्वाध्याय किया है। यदि किसी को कण मात्र भी संशय है तो मनुस्मृति, उपनिषदों, वैशेषिक-सूत्रों व महाभारत का स्वाध्याय करें। क्षत्रिय राजाओं के राज्य में राजा का राज्याभिषेक तभी होता था जब वह धर्मरक्षा की प्रतिज्ञा करता था। धर्म की रक्षा करना सभी वर्णों का परमधर्म है। ॐ तत् सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
३१ मई २०२६

No comments:

Post a Comment