Friday, 26 June 2026

भारत की वर्तमान समस्याओं का समाधान ---

 भारत की वर्तमान समस्याओं का समाधान ---

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इस विषय पर बड़ी गंभीरता से मैंने चिंतन किया है, और मैं स्पष्ट रूप से इस निर्णय पर पहुंचा हूँ कि भारत की सभी समस्याओं का समाधान सत्य-सनातन-धर्म की दृढ़तापूर्वक पुनः प्रतिष्ठा से ही संभव है। जब तक हमारी आस्था -- पुनर्जन्म, कर्मफल, और आत्मा की शाश्वतता में नहीं होगी, तब तक हमारे राष्ट्रीय चरित्र में कोई सुधार नहीं आ सकता।
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हमारा मूल है सनातन-धर्म, जिसमें हमें दृढ़ता से बापस लौटना ही पड़ेगा। भारत में समाज को प्रेरणा और शक्ति मिलती थी — ब्राह्मणत्व से। भारतीय संस्कृति और दर्शन में ब्राह्मणत्व का अर्थ किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के सर्वोच्च चरित्र, ज्ञान, और आध्यात्मिक अवस्था से है। "ब्रह्म" का ज्ञाता जो परम-सत्य परमात्मा को जानता है, ब्राह्मण है। "ब्रह्म जानाति ब्राह्मणः"। सात्विक आचरण, लोभ, मोह, और अहंकार से मुक्त होकर ज्ञान, सत्य और सदाचार का पालन ही ब्राह्मणत्व है। त्याग, संयम, ज्ञानार्जन, जन-कल्याण और तपस्या को जीवन का मुख्य उद्देश्य मानना -- ब्राह्मणत्व है। उस ब्राह्मणत्व को जागृत किये बिना राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। यह ब्राह्मणत्व ही समाज का नेतृत्व कर सकता है।
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हमें आवश्यकता है एक ब्रह्म-शक्ति की। ब्रह्म-शक्ति का अर्थ -- "परमब्रह्म परमात्मा की शक्ति" यानि आध्यात्मिक ऊर्जा है। यह इस सृष्टि की सर्वोच्च चेतना है, जो आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके लिए अनेक साधकों को साधना यानि तपस्या करनी पड़ेगी। यह ब्राह्मणत्व ही भारत की रक्षा कर सकता है, अन्य कुछ भी नहीं। यही हमारी साधना हो।
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"नमस्ते लोकनाथाय नमस्ते सृष्टिकारिणे।
नमस्ते वेदरूपाय नमस्ते ब्रह्मणे नमः॥"
"ॐ वेदात्मने विद्महे, हिरण्यगर्भाय धीमहि, तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात्॥"
ॐ तत् सत्॥ ॐ स्वस्ति॥ ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
२६ जून २०२६
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पुनश्च: --- मैं अब तक लगभग ४५०० छोटे-बड़े आलेख लिख चुका हूँ। और कुछ भी लिखने की इच्छा अब नहीं रही है। बाकी बचा हुआ सारा जीवन परमब्रह्म की ध्यान साधना में ही बीत जाये। जीवन में खूब स्वाध्याय किया है, अब केवल परमात्मा का ध्यान करने की अभीप्सा ही बची है। कोई आकांक्षा नहीं रही है।

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