Friday, 23 January 2026

आजकल कहा जा रहा है कि जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता --

आजकल कहा जा रहा है कि जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता। संस्कार व कर्म से ही ब्राह्मण होता है। चलो यह मान लेते हैं।

फिर यह भी मानना पड़ेगा कि जन्म से कोई अनुसूचित जाति / जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / व अल्प संख्यक भी नहीं होता, सब कर्म से ही होते हैं।
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यह परिभाषित हो कि आरक्षित वर्ग का मापदंड क्या व क्यों है ? क्या यह देश केवल आरक्षित वर्ग का ही है? क्या अनारक्षित वर्ग को आत्म-सम्मान से जीने का अधिकार नहीं है? क्या भारत में कभी समान-नागरिक-संहिता लागू होगी?
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भारत में शासकों ने "अन्य पिछड़ा वर्ग" नाम से एक वर्ग को बलात् उत्पन्न कर उसे तथाकथित अगड़ा वर्ग के विरुद्ध खड़ा कर दिया है। उनके अनुसार यह देश सनातन धर्म को गर्व से मानने वाले ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों का नहीं है, केवल तथाकथित दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों, और अल्पसंख्यकों का ही है।
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वर्ग-संघर्ष अपने पीछे एक विनाशलीला छोड़ जाता है। विश्व में जहाँ भी वर्ग-संघर्ष हुआ है उसमें लाभ केवल शासकों को ही हुआ है। अनारक्षित लोगों को हीन न माना जाये। साम्यवाद व समाजवाद जैसी व्यवस्थाओं का जन्म वर्ग-संघर्ष से ही होता है। इन व्यवस्थाओं का अंत भी समय के साथ हो जाता है। सेकुलर और समाजवादी शब्दों का अब कोई औचित्य नहीं है।
वर्णाश्रम धर्म की स्थापना निश्चित रूप से एक दिन बापस होगी। तब तक यह कुव्यवस्था बनी रहेगी। जो राष्ट्रभक्त लोग समान-नागरिक-संहिता की अपेक्षा कर रहे थे, उन्हें बड़ी निराशा हुई है। मैं किसी भी तरह के आरक्षण का विरोध करता हूँ। समान नागरिक संहिता लागू हो।
१९ जनवरी २०२६

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