आध्यात्मिक लेखों के पाठक नगण्य यानि नहीं के बराबर हैं। व्हाट्सएप पर ब्रोडकास्ट लिस्ट को हटा दिया है। आवश्यकता पड़ी तो नयी सूचि बनाऊँगा।
सारी चेतना और सारी सृष्टि परमशिवमय है। उनसे अन्य कुछ भी नहीं है। उनकी सर्वव्यापकता का निरंतर ध्यान, और उनमें स्वयं का समर्पण हो। और कुछ भी नहीं चाहिये। ॐ ॐ ॐ !!
"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥१८:६६॥" (श्रीमद्भगवद्गीता)
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