मुझे एक आतंरिक आश्वासन प्राप्त है कि निकट भविष्य में भारत से असत्य और अंधकार की शक्तियों का पराभव होगा, व सत्य-सनातन-धर्म की सम्पूर्ण विश्व में पुनः प्रतिष्ठा और वैश्वीकरण होगा।
जिससे अभ्युदय और निःश्रेयस की सिद्धि होती है, व जिसके दस लक्षण मनुस्मृति में बताये गए हैं, वह सत्य-सनातन-धर्म है। रात्रि में सोने से पूर्व, और प्रातः उठते ही कुछ देर भगवान का भजन, कीर्तन व ध्यान करें। पूरे दिन भगवान को अपनी स्मृति में रखें और निज जीवन का केंद्र-बिन्दु बनायें। हम निमित्त मात्र होकर भगवान के उपकरण बनेंगे तो धर्म हमारी रक्षा करेगा। निज जीवन में भगवद्-प्राप्ति यानि आत्म-साक्षात्कार हमारा बड़े से बड़ा धर्म है। भगवान को निरंतर अपनी स्मृति में रखें, कभी भूलें नहीं। हरिः ॐ तत्सत् ॥ ॐ ॐ ॐ ॥
कृपा शंकर
६ जनवरी २०२६
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