Thursday, 30 October 2025

अमानित्व, अदम्भित्व, व सत्यनिष्ठा बहुत बड़े गुण हैं, जो भगवान को प्रिय हैं ---

 अमानित्व, अदम्भित्व, व सत्यनिष्ठा बहुत बड़े गुण हैं, जो भगवान को प्रिय हैं|

हमारे विचारों व व्यवहार में कोई कुटिलता न हो| सारे कार्य ईश्वर प्रदत्त निज विवेक के प्रकाश में करें| अच्छी तरह सोच-समझ कर ही कुछ बोलें| कम से कम शब्दों का प्रयोग करें| अपना मार्गदर्शन अपने हृदय में बिराजमान परमात्मा से ही लें| उनसे बड़ा हितैषी और मित्र अन्य कोई नहीं है| झूठ-कपट से बचें| भगवान ही एकमात्र वरणीय हैं| उनको पाने की अभीप्सा, स्मृति व परमप्रेम निरंतर बना रहे| अन्य कुछ भी नहीं चाहिए|
ॐ तत्सत ! ॐ ॐ ॐ !!
३१ अक्तूबर २०१९

पूर्वाञ्चल (पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार) के सभी श्रद्धालुओं को कार्तिक शुक्ल षष्ठी को आने वाले छठ पर्व पर अभिनन्दन, नमन और शुभ कामनाएँ --------

 पूर्वाञ्चल (पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार) के सभी श्रद्धालुओं को कार्तिक शुक्ल षष्ठी को आने वाले छठ पर्व पर अभिनन्दन, नमन और शुभ कामनाएँ --------

पूर्वांचल के लोगों के लिए छठ बड़े से बड़ा त्यौहार है| यह पर्व चार चरणों में मनाया जाता है| इस पर्व पर कुंआरी और विधवा महिलाएं व्रत नहीं रखती (१) प्रथम चरण में व्रती महिलाएं उपवास रखती है,यह उपवास का पहला दिन होता है| (२) द्वितीय चरण में व्रती महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं| यह दूसरा दिन होता है| (३) तृतीय चरण में अस्त होते हुए सूर्य को नदी या तालाब के किनारे अर्घ्य दिया जाता है| यह तीसरा दिन होता है| (४) चतुर्थ चरण में प्रातः उगते हुए सूर्य को अर्घ्य, हवन के साथ दिया जाता है| यह चौथा दिन होता है| यह सभी व्रतों में कठिन व्रत माना जाता है| परिवार के सभी सदस्य व्रती महिला के सामने खड़े होकर अर्घ्य देते हैं| इस व्रत में पुत्र एवं पति के कल्याण की कामना की जाती है.पुत्र प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है| भगवान भुवन भास्कर आदित्य सब का कल्याण करें| ॐ ॐ ॐ ||
कृपा शंकर
३१ अक्तूबर २०१९

मानित्व (स्वयं में श्रेष्ठता का भाव), और दम्भित्व (झूठा दिखावटीपन) - ये दोनों पतन के मार्ग हैं ---

 मानित्व (स्वयं में श्रेष्ठता का भाव), और दम्भित्व (झूठा दिखावटीपन) - ये दोनों पतन के मार्ग हैं। "मैं कुछ हूँ" -- का भाव निश्चित रूप से पतन के गर्त में धकेल देगा।

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यह शरीर एक मोटर साइकिल मात्र है जो हमें लोकयात्रा के लिए मिली हुई है। इसकी देखभाल भी आवश्यक है, लेकिन हम यह मोटर साइकिल नहीं हैं।
सारा ब्रह्मांड हमारा शरीर है, और हमारे माध्यम से भगवान स्वयं को व्यक्त कर रहे हैं। अपनी पृष्ठभूमि में निरंतर अपने इष्टदेव को रखिये। वे ही कर्ता हैं, हम तो निमित्त मात्र हैं।
विश्व का घटनाक्रम इस समय अकल्पनीय गति से परिवर्तित हो रहा है। कुछ भी कभी भी हो सकता है। अपने स्वधर्म को न भूलें, उसका पालन करते रहें, व परमात्मा की चेतना में रहें। फिर चाहे पूरा ब्रह्मांड टूट कर बिखर जाये, हमारा कोई अहित नहीं होगा।
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गीता के १३वें अध्याय का आज के दिन एक बार अर्थ को समझते हुए पाठ अवश्य कीजिये। बहुत अधिक लाभ होगा जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
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ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
३१ अक्तूबर २०२१

३१ अक्टूबर को पश्चिमी ईसाई देशों में मनाये जाने वाला Halloween का त्यौहार ---

 ३१ अक्टूबर को पश्चिमी ईसाई देशों में मनाये जाने वाला Halloween का त्यौहार यदि भारत में भी अंग्रेजों के कुछ मानस पुत्र मनाते हैं तो यह एक फूहड़ता के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है| यह अंधविश्वास की पराकाष्ठा है| यह भूतों को भगाने का त्यौहार है| कुछ लोग भूतों के से कपड़े पहिनते हैं और कुछ लोग उनसे भी अधिक डरावने कपड़े पहिन कर भूतों को डरा कर भगाते हैं| ऐसी कुरीतियों से मन में गलत संस्कार पड़ते हैं| अब तो इस कुत्सित त्योहार पर होने वाली सेक्स पार्टियों ने घोर यौन-पतन और मनोरोग का रूप ले लिया है।

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गोवा में एक बार अपने कुछ रोमन कैथोलिक मित्रों से बात कर रहा था तो उन्होंने बताया कि वे लोग रात में भोर होने तक घर से बाहर तब तक नहीं निकलते जब तक कि चर्च की घंटियाँ नहीं बजतीं। उनके अनुसार आधी रात के बाद से सडकों पर उन हिन्दुओं के भूत घूमते हैं जिन की पुर्तगालियों ने ह्त्या की थी। वे भूत प्रातः चर्च की घंटी की आवाज़ सुनकर भाग जाते हैं।
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पश्चिमी जगत में और भारतीय अंग्रेजों के मानसपुत्रों में जितना ढोंग और अंधविश्वास है, उसके सामने तो सही भारतीयों में कुछ है ही नहीं।
३१ अक्तूबर २०२१

विश्व में शांति कैसे स्थापित हो? ---

 विश्व में शांति कैसे स्थापित हो? --- (भाग १)

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इस पृथ्वी पर सत् तत्व का अभाव है, और द्वन्द्वात्मक सृष्टि है, इसलिए यहाँ कभी शांति स्थापित नहीं हो सकती। यहाँ हम एक पाठ सीखने के लिये आते हैं। वह पाठ निरंतर पुनरावृत होता रहता है। जितना शीघ्र उस पाठ को सीख लें उतना ही अच्छा है, अन्यथा हम उस पाठ को सीखने के लिए बाध्य कर दिये जाते हैं।
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द्वंद्व से ऊपर अद्वैत में हमें जागृत होना होगा। सर्वप्रथम तो यह समझना होगा कि हम यह नश्वर शरीर नहीं, एक शाश्वत आत्मा हैं। फिर यह समझना होगा कि हम अपने कर्मफलों को भोगने के लिए ही बार बार जन्म लेते हैं। हमारे कर्म क्या हैं? हमारे विचार, हमारी आकांक्षाएँ, हमारा लोभ, और हमारा अहंकार -- ही हमारे कर्म हैं जो हमें पाशों में बांधते हैं। जब तक हम इन पाशों में बंधे हैं, तब तक पशु ही हैं। जब तक हमारा आचरण पाशविक है, तब तक कैसा सुख और कैसी शांति?
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हम कितना भी स्वस्ति-वाचन कर लें, लेकिन शांति एक दुःस्वप्न ही बनी रहती है।
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष शान्ति:
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वेदेवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:
सर्वं शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
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श्रीमद्भगवद्गीता का सांख्य-योग नामक द्वितीय अध्याय इस विषय पर स्पष्ट प्रकाश डालता है। पहले हमें निज जीवन में शांति स्थापित करनी होगी। वह कैसे करें? इसी समय भगवान श्रीकृष्ण की शरण लें और उन्हें निज जीवन में अवतरित करें। गीता के सांख्य-योग का स्वाध्याय करें। उसे समझ कर पूरी गीता का स्वाध्याय करें। निज जीवन में शांति आएगी तभी समाज में, राष्ट्र में, और विश्व में शांति स्थापित होगी। इस द्वन्द्वात्मक सृष्टि से ऊपर हमें उठना होगा।
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ॐ तत्सत् !! ॐ ॐ ॐ !!
कृपा शंकर
३१ अक्तूबर २०२३
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पुनश्च: ----
विश्व में शांति कैसे स्थापित हो? (भाग२)
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इस विषय पर देश-विदेश में अनेक मज़हबी/रिलीजियस विचारकों से मेरी चर्चा हुई है।
(१) लगभग सभी इस्लामिक विचारकों ने कहा कि इस्लाम ही एकमात्र मानव धर्म है। यदि धरती पर रहने वाले सभी इंसान अल्लाह के पैगंबर में ईमान ले आयें तभी विश्व शांति स्थापित हो सकती है। सभी का कहना था कि सबसे पहिले हम अच्छे इंसान बनें। अच्छे इंसान का अर्थ है कि हम उन के अनुयायी बनें, अन्यथा हम अच्छे इंसान नहीं हैं। सिर्फ ईमान वाले अच्छे इंसान ही जन्नत में जाएँगे। बाकी सब को दोज़ख की आग में भुनना पड़ेगा।
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(२) ईसाई मत के विभिन्न संप्रदायों के अनेक पादरियों से विदेशों में मेरी खूब बातचीत हुई है। सभी पादरियों ने ही यह कहा कि हम स्वयं को पापी मानें और परमात्मा के एकमात्र पुत्र में विश्वास करें, तभी पृथ्वी पर सुख-शांति स्थापित हो सकती है, अन्यथा नहीं। एक बार एक पादरी मुझे देखकर बहुत उदास हो गया। मैंने उससे उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने कहा कि तुम इतने अच्छे आदमी हो, लेकिन कयामत के दिन तुम नर्क की शाश्वत अग्नि में तड़फाये जाओगे। उसने कहा कि ईसा मसीह खुद गवाही देंगे कि किस किस व्यक्ति ने उन पर विश्वास किया। जिन के बारे में वे स्वयं गवाही देंगे, सिर्फ उनको ही स्वर्ग में जाने दिया जाएगा। बाकी सब नर्क की अग्नि में तड़फाये जाएँगे।
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(३) भारत के धर्मनिरपेक्ष सेकुलर मार्क्सवादी सभी भारतियों को मूर्ख समझते हैं। वे सिखाते है कि --
सभी धर्म एक समान हैं। सभी में एक ही बात लिखी है। कोई भी मजहब आपस में वैर करना नहीं सिखाता। जो बात गीता में लिखी है, वही कुरान में और बाइबिल में लिखी है। सभी धर्म-ग्रन्थों में एक ही बात है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।
अंततः वे एक ही बात पर आ जाते हैं कि सारे धर्म एक अफीम का नशा है। अतः सब धर्मों को छोड़कर धर्मनिरपेक्ष सेकुलर बन जाओ। मार्क्सवाद में तो ईश्वर में आस्था रखना एक ऐसा भयंकर अपराध है जिसकी सजा मृत्यु दंड है।
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मुझे लगता है कयामत के दिन बहुत अधिक शोरगुल होगा, और खुद का नंबर आते आते ही पता नहीं कितने वर्ष लग जाएँगे। लाखों वर्षों से कब्र में पड़े हुए इंसान उठेंगे और लाइन में लग जाएँगे। लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसे है जो अपनी कब्रों में आराम से सो रहे होंगे। उर्दू के प्रसिद्ध शायर मीर ने लिखा है --
"हम सोते ही न रह जावें ऐ शोर-ए-क़यामत
इस राह से निकलो तो हम को भी जगा जाना"
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आजकल महँगी से महँगी शराब पीते हुए हुए वातानुकूलित कमरों में ईश्वर पर चर्चा करना फैशन है। हो गया है। लेकिन मैं इस फैशन से दूर हूँ। यही नहीं, आजकल लोग सब तरह के पाप जैसे जूआ, परस्त्री/पुरुष गमन, घूसख़ोरी व चोरी करते हुए भी भगवान से सहायता मांगते हैं।
वर्तमान समाज में मैं स्वयं को अपात्र (Misfit) पाता हूँ। आप सब ने यह लेख पढ़ा, जिस के लिए आपको धन्यवाद ॥ ॐ तत्सत् !!
कृपा शंकर
१ नवंबर २०२३

अपना एक हाथ भगवान को थमा दो; भगवान हमारे दोनों हाथों को पकड़ कर हमारा उद्धार कर देंगे ---

 अपना एक हाथ भगवान को थमा दो; भगवान हमारे दोनों हाथों को पकड़ कर हमारा उद्धार कर देंगे| हमारे जीवन में हमारी चाहे लाखों भूलें हों, यदि हम सत्यनिष्ठा से सुधरना चाहें तो भगवान हमारी हिमालय जितनी बड़ी-बड़ी लाखों भूलों को भी क्षमा कर देते हैं| अपना बुरा-भला सब कुछ भगवान को सौंप दो और उन्हीं के होकर रह जाओ|

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"उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्| आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः||६:५||"
मनुष्य को अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिये और अपना अध: पतन नहीं करना चाहिये; क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है और आत्मा (मनुष्य स्वयं) ही आत्मा का (अपना) शत्रु है||
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"सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज| अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः||१८:६६||"
सब धर्मों का परित्याग करके तुम एक मेरी ही शरण में आओ, मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, तुम शोक मत करो| .
हे जगन्माता, रक्षा करो| बालक विष्ठा में पड़ा होता है तब माँ ही उसे उज्ज्वल कर सकती है| अपने आप तो वह कभी स्वच्छ हो नहीं सकता| यह सांसारिकता भी किसी विष्ठा से कम नहीं है| हम ने तो कहा नहीं था कि आप हमें इस माया-मोह में डालो| आप ने ही "बलादाकृष्य मोहाय, महामाया प्रयच्छति" यानि बलात् आकर्षित कर के इस माया-मोह रूपी घोर नर्ककुंड में डाला| अब आप को ही हमें मुक्त करना होगा| हमारा सामर्थ्य आप ही हो| हमारे में स्वयं में कोई सामर्थ्य नहीं है| बड़ी बड़ी बातें, बड़ा बड़ा ज्ञान अब हमें अच्छा नहीं लगता| हमें सिर्फ आपका प्रेम चाहिए, और कुछ भी नहीं| आपका प्रेम ही हमारा मोक्ष है, वही हमारी मुक्ति है| आपके पूर्णप्रेम के अतिरिक्त हमें और कुछ ही नहीं चाहिए| हम आपकी शरणागत हूँ| हमारा कल्याण करो, हमारी निरंतर रक्षा करो| कृपा शंकर ३० अक्तूबर २०१९

दुर्भाग्य से वर्तमान में हिन्दू जाति का कोई भी राजनेता -- धर्मनिष्ठ और तेजस्वी नहीं है ---

दुर्भाग्य से वर्तमान में हिन्दू जाति का कोई भी राजनेता -- धर्मनिष्ठ और तेजस्वी नहीं है। धर्मनिष्ठ और तेजस्वी व्यक्ति तो बहुत हैं, लेकिन कोई राजनेता नहीं है। क्या ऐसा कोई तेजस्वी हिन्दू-धर्मनिष्ठ राजनेता है जिसे ---

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(१) हिन्दू समाज से प्रेम हो? (२) जो हिन्दू समाज की रक्षा और वृद्धि के लिए सक्रिय कार्य कर रहा हो? (३) हिन्दू समाज पर प्राणों का संकट आ जाने पर अधिकतम बुद्धि और विवेक लगाकर रक्षा का प्रयास करे।
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बांग्लादेश और पाकिस्तान में मारे जा रहे हिंदुओं के लिए शासन में आने पर भी भारत के हिन्दू राजनेता आज तक यह नहीं कह पाये कि विश्व में कहीं भी हिंदुओं पर संकट होगा तो भारत सरकार चुप नहीं बैठेगी, और हम उसके लिए सक्रिय हस्तक्षेप करेंगे। वे धर्मनिष्ठ कैसे हो सकते हैं? भारत में हिंदुओं के विरुद्ध अनेक संवैधानिक प्रावधान हैं जिन्हें समाप्त नहीं किया गया है। उनके विरुद्ध कोई भी राजनेता नहीं बोल रहा है।
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हे माँ भारती, हिन्दू जाति में तेजस्वी वीर पुरुषों को जन्म दे, जो हिंदुओं का नेतृत्व और रक्षा कर सकें।
सत्य-सनातन-धर्म की जय !
काशी विश्वनाथ की जय !
मोर-मुकुट बंसीवाले की जय !
हर हर महादेव !
३० अक्तूबर २०२१