भारतीय जनता पार्टी जब तक आदरणीय डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं.दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चल रही थी तब तक मैं भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का कट्टर समर्थक था। अब जब से पार्टी ने उन्हें छोड़कर भीमराव रामजी सकपाल उर्फ डॉ.भीमराव रामजी अंबेडकर का अनुसरण करना आरंभ कर दिया है जिन्हें वे बाबा साहब डॉ.अंबेडकर कहते हैं; मैं तटस्थ हो गया हूँ, और कोई अन्य विकल्प देख रहा हूँ।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मैं पिछले ६४ वर्षों से जुड़ा हुआ हूँ। इस संगठन का उद्देश्य हिन्दू राष्ट्र को संगठित करना है। लेकिन जिस तरह से SC/ST Act व UGC के काले क़ानूनों के द्वारा हिंदुओं में वर्गभेद उत्पन्न कर उन्हें वर्गसंघर्ष द्वारा तोड़ा जा रहा है, वह भी संघ समर्थितों द्वारा; मैं संघ से भी निराश होकर तटस्थ हो गया हूँ, और अन्य दूसरा विकल्प ढूंढ रहा हूँ।
फिर संघ ने अंबेडकर, फुले, राम मोहन रॉय, व पेरियार जैसों को आदर्श पुरुष बना रखा जो घोर हिन्दू द्रोही थे।
३ अक्टूबर २०२६
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