अगले दो-तीन वर्षों में अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था विफल हो जायेगी, और अमेरिका एक महाशक्ति नहीं रहेगा।
Tuesday, 25 August 2026
अगले दो-तीन वर्षों में अमेरिका की अर्थ-व्यवस्था विफल हो जायेगी, और अमेरिका एक महाशक्ति नहीं रहेगा।
Sunday, 23 August 2026
श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है|
श्री अरविन्द के शब्दों में कितना बड़ा सत्य छिपा पड़ा है| भारत की वर्तमान समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए अरविन्द के इन शब्दों को समझना आवश्यक है|
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
भवसागर को गोते लगाए बिना पार करें :----
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें।
अपनी प्रज्ञा को निरंतर हर समय -- अव्यय, अनंत, ज्योतिर्मय परमब्रह्म परमात्मा में ही स्थित रखें। वे ही नारायण हैं, वे ही पुरुषोत्तम हैं, और वे ही परमशिव हैं। इसके लिए हमें वीतराग यानि राग-द्वेष और अहंकार से तो मुक्त तो होना ही होगा। यह आरंभिक लक्ष्य है।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
अपनी प्रज्ञा अब परमात्मा को सौंप रहा हूँ। मेरी प्रज्ञा अब से परमात्मा में ही स्थित रहेगी।
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है - --
मेरा शत्रु कहीं बाहर नहीं, मेरे भीतर ही बैठा है। मुझे मेरी सब कमियों का पता है, लेकिन उनके समक्ष मैं असहाय हूँ। भगवान से मैंने प्रार्थना की तो भगवान ने कहा कि अपने सब शत्रु मुझे सौंप दो, लेकिन उनसे पहले स्वयं को (यानि अपने को) मुझे (यानि भगवान को) अर्पित करना होगा। स्वयं को अर्पित करने में बाधक है मेरा लोभ और अहंकार, यानि कुछ होने का और खोने का भाव।
Saturday, 22 August 2026
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है ---
भगवान की भक्ति का मौसम सदा चलता ही रहता है। राजस्थान की भूमि तो भक्ति और आस्था का संगम है। यहाँ के लोगों के स्वभाव में भगवान की बहुत गहरी भक्ति है, बस कोई जगाने वाला चाहिये।
Tuesday, 18 August 2026
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता" ---
मनुष्य का स्वभाविक स्वधर्म है ..... "परम तत्व की खोज और उससे एकात्मता"| इस स्वधर्म की रक्षा का अनवरत प्रयास ही मेरी दृष्टि में आध्यात्म है, अन्य कुछ भी नहीं| आध्यात्म कोई व्यक्तिगत मोक्ष, सांसारिक वैभव, इन्द्रीय सुख या अपने अहंकार की तृप्ति की कामना का प्रयास नहीं है| यह कोई दार्शनिक वाद विवाद या बौद्धिक उपलब्धी भी नहीं है| साथ साथ सज्जनों की रक्षा और दुर्जनों का विनाश भी हमारा लौकिक धर्म है|
जाने कहाँ गये वो दिन
जीवन में आमूलचूल परिवर्तन भी पीड़ा देता है। जो कुछ भी जीवन में मैंने देखा, वह सारा परिदृश्य ही बदल गया है। पुराने लोग ऊपर चले गए। बड़े बड़े शानदार भवन सूने होकर खंडहर होने लगे हैं। सारे शत्रु-मित्र पता नहीं कहाँ चले गए। बड़े-बड़े राजसी महल, बड़ी-बड़ी हवेलियाँ, अब सुनसान और खंडहर हो रही हैं। कभी ये भी बहुत शानदार थीं, और बड़े-बड़े शानदार लोग इनमें भी रहते थे। हमारी दो सौ वर्ष पुरानी पारिवारिक हवेली जो कभी बहुत शानदार थी, अब देखभाल के अभाव में खंडहर हो रही है, जिसे देखकर पीड़ा होती है। इतने विभाजन हो गए हैं कि मरम्मत करवाए तो भी कौन? हमारे पूर्वजों की छह-सात पीढ़ियाँ उसमें रही हैं। मेरा भी बचपन, किशोरावस्था और यौवन का कुछ भाग उसी में बीता है।
अफीम के उत्पादन और उपयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो और भी अधिक कठोर होना चाहिए।
अफीम के उत्पादन और उपयोग पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण है जो और भी अधिक कठोर होना चाहिए। दर्दनाशक और अवसाद-मुक्ति की दवाइयों के निर्माण के लिए अफीम की आवश्यकता पड़ती है, जिसके उत्पादन के लिए किसानों को सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है। बिना लाइसेंस के अफीम उगाना एक अपराध है जिसमें जमानत भी नहीं होती।
दान-पुण्य से उत्तम गति तो प्राप्त होती है, पर जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता। परमात्मा को पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ी साधना है।
दान-पुण्य से उत्तम गति तो प्राप्त होती है, पर जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता। परमात्मा को पूर्ण समर्पण ही सबसे बड़ी साधना है। गीता में भगवान कहते हैं --
विश्व की स्थिति बड़ी विचित्र है।
विश्व की स्थिति बड़ी विचित्र है। यहाँ मैं अपनी आंतरिक अनुभूतियाँ ही लिख रहा हूँ जो विश्व की वर्तमान घटनाओं का मेरा विश्लेषण है। कोई आवश्यक नहीं है कि इससे कोई सहमत ही हो। मैं जो लिख रहा हूँ, किसी की भावनाओं को आहत किए बिना मेरा अभिव्यक्ति का अधिकार है।
कर्ता कौन है? ---
सारी सृष्टि, सारे सूर्य-चन्द्र, ग्रह-नक्षत्र, सब एक नियम से चल रहे हैं। पृथ्वी नियमित रूप से अपने सूर्य की परिक्रमा कर रही है। अग्नि की लपट ऊपर की ओर, व जल की गति नीचे की ओर है। वायु अपनी ही चाल से चलती है। इस देह में रक्त का संचार हो रहा है, बाल और नाखून अपने आप बढ़ रहे हैं, भूख-प्यास व सर्दी-गर्मी लग रही है, शरीर की सारी क्रियाएँ अपने आप हो रही हैं। अपने आप ही अनेक तरह की वासनाओं का जन्म होता है। जीवन में सुख-दुःख की अनुभूतियाँ होती हैं। तरह तरह की स्पृहाओं/आकांक्षाओं व प्रेम और अभीप्सा का जन्म होता है। नित्य इतने लोगों का जन्म और मृत्यु होती है। इन सब का कर्ता कौन है? मैं कौन हूँ? कभी इन पर भी विचार करो, जीवन धन्य होगा।
सनातन धर्म अभी भी जीवित क्यों है? ---
सनातन धर्म अभी भी जीवित क्यों है? ---
Monday, 17 August 2026
अब और अधिक समय मिलेगा भगवान की उपासना (भक्ति) के लिए ---
अब और अधिक समय मिलेगा भगवान की उपासना (भक्ति) के लिए ---
मैं जला तो सही, पर अंधेरे को उजाला न दे सका ---
मैं जला तो सही, पर अंधेरे को उजाला न दे सका ---
सारे देवी-देवता परमात्मा की ही निरंतर उपासना करते हैं। उनकी शक्ति परमात्मा का ही अनुग्रह है। उनका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। फिर हम परमात्मा को छोड़कर, उनकी आराधना क्यों करते हैं?
सारे देवी-देवता परमात्मा की ही निरंतर उपासना करते हैं। उनकी शक्ति परमात्मा का ही अनुग्रह है। उनका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। फिर हम परमात्मा को छोड़कर, उनकी आराधना क्यों करते हैं?
सत्य-सनातन-धर्म की पुनःप्रतिष्ठा और वैश्वीकरण कब होगा?
सत्य-सनातन-धर्म की पुनःप्रतिष्ठा और वैश्वीकरण कब होगा?
Sunday, 16 August 2026
परमात्मा के किस रूप का ध्यान करें ?
ध्यान हमेशा परमात्मा के आदित्य-वर्ण का ही किया जाता है। यह बात भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्पष्ट रूप से कही है, जिस पर तनिक भी संशय नहीं किया जा सकता। भगवान कहते हैं --
Saturday, 15 August 2026
सिंहावलोकन या विहंगावलोकन ---
"ॐ ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं, द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्|